डटे रहेगें

*कविता*डटे रहेगें  खड़े रहेगें ज़िंदगी की लड़ाई में डटे रहेगें जिंदगी की तन्हाई में मुश्किल मँडराते है सफ़र में चलती है जिंदगी नफ़रत में छिपती रहेगी ख्वाबों की राज़ दिखती रहेगी यादों की ताज हट जाती है नफरत की शिकार आ जाती है खुशियों की बेकार छिप जाती है … Read more

अँधेरे में भी

*कविता*अँधेरे में भी कही दूर खड़े में अँधेरे में भी यादों को ही दोहराता हूँ छिपी हुई मुलाक़ातों में भी खुद को ही पहचानता हूँ चलते है ओर बढ़ते है जिंदगी की राह भटकते है छिपते है ओर ढलते है जीने की साँस हम मरते है कही शोर है तो कही मोड़ है वक्त की तन में हमेशा दौड़ हैं ख… Read more

मुरझाये-मुरझाये

*कविता*मुरझाये-मुरझाये आज भी लोग रो देते है ज़िंदगी को छोड़ देते है मजबूरियाँ भी बाँध लेती है तजुर्बा भी छिपा देती है डग की चाह भी रोक लेती है मन की राह भी छोड़ देती है वेदना की पुकार आती है ज़िंदगी में कही बार आती है प्रहार की तकरार आती है ज़िंदगी की म… Read more

रातें की डोर

*कविता*रातें की डोर आँखों से भरी बातें थी ज़िंदगी से लड़ी रातें थी छिपे-छिपे से ये पल थे ज़िंदगी के पन्नें ये कल थे बोल देते है ये पल की डोर देख लेते है ये सच की छोर कही-कही यादें टूट जाती है टूटे पल ज़िंदगी रूठ जाती है छिपी रहती है क्षणों की दौड़ आती र… Read more

कभी-कभी हम

*कविता*कभी-कभी हम कभी-कभी हम अधूरे लगते है सही वचन में भी झूठे लगते है लोगों की बातें आत्मा को सता देती है कष्ट की नज़र तुझको भी बैठा देती है कभी-कभी खुद को खो देता हूँ सपनों की यादों में ही छोड़ देता हूँ ज़िंदगी का वक्त में लौट जाता हूँ सपनो की दुनिया से … Read more

वक्त अधूरा

*कविता*वक्त अधूरा  वक्त अधूरा चलता जा रहा है ज़िंदगी की बुराई बढ़ता जा रहा है राहों की डोर तड़पता जा रहा है ज़िंदगी के पल ढलता जा रहा है दिखती नही है उजाले की किरण छिपती नही है ज़माने की गगन आती-रहती है ये तरंगों की लहर जाती-रहती है ये मलंगो की पहर दिखती… Read more

मन ही तो है जो

*कविता*मन ही तो है जो  मन कभी ठहरता ही नही वक्त कभी बदलता ही नही सोच की जग में डूबा देता है मुझे वक्त के क्षण में छिपा लेता है मुझे मन ही तो है जो मुझे बार-बार बोलती है ज़िंदगी तो है जो मुझे बार-बार तोलती है मन कही दूर ले जाता हैं सुबह के नूर छोड़ आता ह… Read more