Showing posts from 2019Show all

किस्मत कहाँ? फूटेगी,भविष्य कहाँ? निकलेगी

*कविता* अगर ढूँढ़ने निकले हो,तो ये रास्तें भी मिल जायेंगे ं नींद को त्यागने निकलो हो,तो ये ख़्वाब भी जुड़ जायेंगे लक्ष्य को पकड़ने निकलो हो,तो ये संघर्ष भी मिल जायेगे खुशी लेने गये हो,तो ये संकट का बादल भी आ  जायेंगे वक्त में वेदना हो,सफलता में वंदना हो दिल … Read more

जो दिल बोलेगा वही लिखूँगा

मन करता है ,भविष्य को  लाँग लूँ किस्मत को बना लूँ,खुद को बचा लूँ जग में सबको दिखा दूँ,खुद को परख लूँ ये धरती को चुम लूँ,यही जहान को मौन लूँ कही ना छोडू़ँगा, कही ना लिखूँगा कही ना बोलूँगा,कही ना सोचूँगा कही ना देखूँगा,कही ना दिखूँगा कही भी रहूँगा,जीवन वही सह… Read more

परी थी,सुहानी थी

*कविता* शांति भरी गली थी आने वाली परी थी सुहाने रंग में फली थी यही उसकी लहरी थी खुदा से माँगता हूँ ,साहस भरी नींद दे दो नींद भरी रात के लिए सपनों की परी दे दो उसी सपनों साथ जीवन की पहेली दे दो हर वक्त में सही,यादें भरी रात तो दे दो नगरी दुनियाँ से,कुदरत … Read more

शायरी

*शायरी* अंधेरा हो या उजाला हो तुम्हारी याद में ही सवेरा हो   " रात्रि की याद में शायरी" एक रात तेरी याद आयी उसी ज़माने में तेरी बात आयी वही हँसी में तेरी मुस्कान आयी दिल पर तीर की वार आयी          "प्रेम ओर प्रेमिका की शायरी" एक पलक … Read more

क्यों? पहचान की बात करते हो

*कविता* क्या? ऊँच-नीच की परख करते हो ये जीवन में क्यों? व्याकूल रहते हो क्यों?भेदभाव की भाषा सिखते हो क्यों नहीं? वक्त को समझ पाते हो क्यों? नही मानव को ही मानव समझ नही पाते हो भेद का अंधकार में ही अंहकार दिखा देते हो सरल दिल की भाषा माना करो कभी किसी पर प… Read more

शहींदो ने माटी को गुलामी नही,आज़ादी बनायी

*कविता* आओ बच्चों शहीदों की कहानी सुनाता हूँ देश बच जाये, उन्हीं की प्रेम कहानी सुनाता हूँ रक्त में हूँ चिंगारी,देश की रक्षा में तैयारी हूँ शहीदों की अमर जवानी की कहानी सुनाता हूँ माँ की ममता छोड़कर,भारत माँ की लाज बचाते है अपना धर्म त्यागकर, देश ही धर्म है … Read more

शंका में ही शक का संदेश आया

*कविता* मर कर भी प्रेरणा बन जाऊँ जी कर भी तमन्ना बन जाऊँ हर लोग में स्नेह बनकर रह जाऊँ मरने के बाद भी भाषा बन जाऊँ जीवन की पीड़ा को भुला ना जाऊँ संचारी भाव को कही छोड़ ना जाऊँ अकाल जीवन में फँसकर रह ना जाऊँ पाप की सागर में बसकर ना रह जाऊँ खुले नेत्र में भ… Read more

भूमंडल में ख्वाब हूँ

*कविता* रात की ख़्वाब होती है,सुहानी से कम नही वक्त की लाज होती है,कोई  जंजीर से कम नही सवेरा भी होती है,कोई उम्मीद से कम नही आत्मा भी बोलती है,नयी जिंदगी से कम नही खुद को कभी अकेला मत समझों हर चीज़ में कभी सफल मत समझों हर सफलता में निराशा मत समझों हर वक्त… Read more

मदहोश बना गया हूँ

*कविता* नींद में चैन खो दिया हूँ ठन्ड में होश खो दिया हूँ होश में मदहोश बन गया हूँ जीवन में बेरोजगार हो गया हूँ ह्रदय की चाहत ही मेरी चाहत थी कवि के अन्दर भी कविता ही थी ह्रदय में चीख थी दिल में कोई बात थी खुले आसमानों  रहना चाहती थी जीवन की चीख से कही दू… Read more

संसार छोड़ेंगे, कहाँ? होंगे

*कविता*  कुछ वर्षों तक ही साँस है ये खुले पवन में ही वास है ये छोटी सी जिन्दगी में भी है ये सभी में विधाता  का निवास है ये कदम-कदम पर संघर्ष है ये आसमान में भी पतझड़ है ये जीवन में भी सूखापन है ये हरियाली की खोज भी है ये मानव समस्या से डर जाते है जीवन व… Read more

चलते है, काल के अतीत में

*कविता* मानव अब शिकार होगा संसार अब विनाश होगा कुदरत अब नाराज होगा दृश्य अब त्रिकाल होगा जग अब डगमगायेगा इंसान अब तड़पेंगा देख रहा हूँ,मानव की चाल सें खत्म कर रहे है,कुदरत की ढाल सें सब विनाश हो रहा है,इंसान की काल सें जीवन घट रहा है,इंसान की बनावटी सें… Read more

देश जल रहा है,अग्नि के राख में

*कविता* अपना देश,अपनों ने ही जला दिया ये धरती माँ को बेटे नें ही रुला दिया बेकसूर का भी रक्त यही पर बहा दिया ना जाने कौन? से लोग विद्रोह बना दिया देश की विकास अपनों ही गिरा दिया देश सबका है,इसे बिगाड़ों मत आज़ादी का देश है,भागाओ मत शहीदों का देश है, बिगाड़… Read more

कदम पर डग नही है चल रहा हूँ

*कविता* कदम पर कदम नही चल सकता हूँ ये ज़माना के बारे नही बता सकता हूँ खुद को धोका भी  नही दे सकता हूँ बिना लिखे रह भी नही सकता हूँ हर सुबह कलम की नोक से लिख देता हूँ दिल का स्नेह कलम में ही उतार देता हूँ ख़्वाब में ख़्वाब ही बनकर लिख देता हूँ दिल की बात पन… Read more

कदम कही ठहर ना जाये

*कविता*कदम कही ठहर ना जाये चल रहे है,कदम कही रुक ना जाये चल रहा है,साँस कही टूट ना जाये जल रहा है,दिल कही राख ना हो जाये अनजान जीवन है,कही भटक ना जाये विश्वास है,कही शक में ना चला जाये ज़िंदगी है,कही बेहाल में ना हो जाये अनदेखी है,कही राहों में ना चला जाये … Read more

जीवन जीओ,तमन्ना बनाकर दिखाओ

*कविता* लाखों कामा रहे है,लोग जीवन नही जी पा रहे है,लोग प्रेम को त्याग रहे है,लोग क्रोध को पुकार रहे है, लोग क्रोध को बाहर मत निकालो लालच को अच्छा मत बताओ खुशियों के पल को मत भागाओ जीवन को गलत दिशा में मत ले जाओ कहाँ?भागते हो,जीवन से कहाँ? जाओगें ,अपने … Read more

बेहद दर्द था उसकी बात

*कविता* हाव-भाव की दशा भी लिखा हूँ उसके ध्यान में कविता भी लिखा हूँ उसके नयनों में प्रेम का संकेत भी देखा हूँ उसकी आवाज़ में बेहद दर्द  भी देखा हूँ जवाब में उसके प्रेम का संकेत भी नही आया संवाद में उसके कोई संवाद भी नही आया मैं अब ठहर गया हूँ ,उस पल से रुठ … Read more

विधाता की राग में जाना चाहता हूँ

*कविता* जंगलों में रहकर सन्यासी बनूँगा जीवन त्याग कर माया से दूर रहूँगा प्रेम का जाल से हटना चाहता हूँ आत्म में ही परमात्मा खोजता हूँ विधाता के चरणों में रहना चाहता हूँ उनकी ही माया में खोना चाहता हूँ हर साँस में उनको ही पुकारता हूँ हर वक्त में उन्हीं को य… Read more

कविता तुम ही हो

*कविता* साहस की नजरियाँ हमें क्यों? दिखाये हो पुष्प की माला हमें क्यों? दिलाये हो मेरी भावना को क्यों? नही समझ पाये हो ये जग में हमें क्यो? भटका रही हो मैं आज भी तुम्हें चाहता हूँ लम्बे ख्वाबों में तुम्हें देखता हूँ मान या मत मान तुम्हें ही चाहता हूँ चाहत … Read more

हाथ बाँधा है, पथ घिरा हैं

*कविता* हाथ बाँधा हुआ है,भाग्य को मत बाँधो जंजीर बाँधे है,उस इंसान को मत रुलाओ अंधेरा उसका वक्त है,ओर अंधेरा मत लाओ खोया उसका दिन है,उसे मत बुलाओ उजाले को खोजता है,खुद को पहचानता है खोया उसका किस्मत है,खोया सा नर भी है जीवन जीना भी है,ख़्वाब को भी देखना है … Read more

किसने? कैसे? क्यो? बनाया ,समझ नही आया

*कविता*  मैं कौन हूँ? कहाँ से आया हूँ? भूमंडल पर कैसा? नर बनकर आया हूँ विचित्र मेरी नाया है विचित्र मैं ही काया हूँ कुदरत की माया है जो नर बनकर आया हूँ कुदरत को किसने बनाया होगा? सागर को किसने बसाया होगा? इसकी गहाराई को कौन? नापा होगा? आकाशगंगा अनंत बुलंद … Read more

अजान हूँ मैं,अजान ये जीवन

*कविता* अजान हूँ मैं,अजान मेरी उड़ान है वक्त में हूँ मैं,वही मेरी पहचान है हर संकट में हूँ मै,वही मेरी जीवन  है हर लोग छोड़ दिये,वही मेरी सिख है जिंदगी से दुखी यही इंसान देखता हूँ वक्त छोड़ते हुए ,हे भगवान सुनता हूँ ये जहान किसने? बनाया ,ऐसा मैं सोचता हूँ … Read more

हिन्दी है हम,हिन्दुस्तान हमारा

*कविता* हिन्दी है हम,हिन्दुस्तान है हम भाषा हमारी ,हिन्दी है हम हर जगह बोलने का अधिकार है हम कवि हैं हम,कविता की पहचान है हम लहरों जैसी स्वर है इसका चाँद जैसा चंद बिन्दु है इसका आभुषण जैसा अलंकार है इसका हिन्दी है,हिन्दुस्तान है इसका भाव से भाव का मिलना … Read more

क्या?पल था,कैसे? बताऊँ

*कविता* खुला इंसान दिखी मुझे खुले विचार की मिली मुझे ना मैं जानता था ना वह जानती थी प्यार का नजरिया था दोनों पास बुला लिया था ऐसा लगा वर्षो से जानती हो मुझे लगा मेरे करीब से गुजरती हो हँस-हँस कर ,साथ रह-रह कर बोलती हो हमेशा हँसकर मेरी बातों को मजाक बनात… Read more

मत लड़ो,कुदरत से

*कविता* कष्ट मत दो धरती को स्वर्ग बनाओ जीवन को जीवन का प्यास बुझाती है स्वर्ग की महिमा दिखाती है काँट रहे हो,वनो की धारा लगा रहे हो,विकास की नारा वस्त्र चीर रहे हो,धरती माँ की खुद को वीर बता रहे हो,माँ की वन उनकी शृंगार है परिंदे उनकी प्यार है पुष्प उन… Read more

मेरा ख़्वाब हो

*कविता* बाँसुरी का धुन हो सरोवर का गुण हो स्नेह भरी रात हो सरोवर में सफ़र हो जल पर ही डगेरा हो नाव पर ही बसेरा हो पुष्प की कोमलता हो  दर्पण में परछाँई हो ख़्वाम भरी रात हो जीवन उसके साथ हो शीतल हवाओ का झोंका हो मौसम का लहरता मौका हो अंगो-अंगो का मिलन… Read more

क्रोध में डुबा हूँ

*कविता* कुछ कहना है तो कह दो अपनी बाते संक्षेप में बात दो भाव को सही दिशा दिखा दो मन की बात खुले मे ं कह दो भला कहो या बुरा कहो पर कह दो जग की भीड़ में विलुप्त हो जाऊँगा कहाँ? ढूंढोगी मुझे मैं वही विलीन हो जाऊँगा कहाँ? देखती हुई भागोगी,मै वही छिपकर रह जाऊं… Read more

माटी ने ऐसा इतिहास बताया

*कविता* जहाँ पीपल के नीचे ज्ञान मिला  जहाँ कवियों का कवि  मिला शहनाई में शहनाईयों का धुन मिला वेदों में वेद के ज्ञाता मिला मंथन में चौदह रत्न मिला महासंतो का सन्यास मिला भक्तों मे विधाता दिखा दानवीर में दानी मिला यहाँ मानव में भगवान दिखा मानव में ही दान… Read more

लक्ष्य को छोड़ा नही

*कविता* बार-बार मुझे हाराया बार-बार मुझे दोहराया कई बार मुझे भागाया कई बार मुझे डराया अपनी व्यवस्था बना नही पाया बेरोजगारी को मिटा नही पाया पैसा कामना नही सिख पाया कोशिश में जीत नही मिल पाया यंत्रों पर रात-दिन हुआ मैं चैन ओर बेचैन भी हुआ मेहनत पर भी हा… Read more

ये जहान को मौन देखता हूँ

*कविता* खड़े होकर वक्त  को चलते देखा हूँ चट्टान पर चढ़कर ये आसमान देखा हूँ राहों में चढ़कर ,ये काँटे का दर्द देखा हूँ अकेले रहकर ,ये जहान को बदलते देखा हूँ कुछ पल है,जो बीत रहा है जिंदगी का सुझाव बता रहा है दिल की गहराई को सता रहा है अंधेरा है,जो घटता जा … Read more

नारी को काली देवी बनाओ

*कविता* नारी  को कालीदेवी बनाओ शासन-प्रशासन मत लाओ देश न्यान को मत बुलाओ नारी शक्ति को तुम बुलाओ चौराये पर ही कटवाओ उन दरिंदो को वही पर मरवाओ सड़क पर उतर कर आओ नौजवान बनकर दिखाओ नारी को दंरिदो से बचाओ घर आकर बहन को बताओ बहन का कर्ज निभाकर दिखाओ वैश्य… Read more

कुदरत से मेरा नाता है

*कविता* कुदरत से मेरा नाता है जो मुझे पास बुलाता है वही अम्बर,वही नजारा दिखाता है वही धरती,वही सहारा बनाता है खुले जीवन को जीने निकला हूँ वक्त में घुमने निकला हूँ खुले गुलशन को देखने निकला हूँ खुले आसमान को छूने निकला हूँ आस-पास को जानने निकला हूँ यहाँ … Read more

वीर तुम जागो,बेटियाँ तुम बचाओ

*कविता* ये सिलसिला रुकता ही नही है ये ज़माना कुछ बोलता ही नही है नारी का सम्मान सही ,वक्त पर होना चाहिये रात में महिलाये दिखे,उसका रक्षा  करना चाहिये दरिंदों से लड़कर ,उसकी देह रक्षा बचाना चाहिये देश को बचाओ,महिलाओ पर अत्याचार नही होना चाहिये रूह को रहू मे… Read more

छोटा सा गाँव है मेरा

*कविता* बादलों का अंधेरा कब?-तक रहेगा तुफानों का डगेरा कब?-तक रोकेगा मंजिल का दरवाजा कभी तो खुलेगा कभी तो मेरा नाम इतिहास में लिखेगा कभी तो मेरा ही चाँद खिलेगा बहुत छोटी सी पहचान है मेरा छोटा सा गाँव ,छोटा सा नाम है मेरा लम्बा आशा है मेरे दिल में लम्बा … Read more

वक्त के शिकन्जे में आकर रोया हूँ

*कविता* मेरे वक्त की लकीर यही है जग में मेरी तकदीर यही है अंधेरे की आहट में रात भर जागना सवेरे की किरणों नयी उम्मीद लेकर भागना मौन गलियाँ भी कुछ कहती नही लोगों की सनसनाहटे भी कुछ बोलती नही शीतल हवाओं का भी सताना कंबल की रूह में भी काँपना जागे पलको में … Read more

मैं अब जागा हूँ

*कविता* मैं अब जागा हूँ वर्षों को त्यागा हूँ वर्षों की माया हूँ देश की छाया हूँ अपने वक्त में लाया हूँ कुदरत को पाया हूँ समय ढलता जा रहा है अंधेरा देखो आ रहा है नया सवेरा आयेगा अंधेरो को भागायेगा नयी उम्मीद की नयी चाँद होगा वक्त की लहरों में नयी पहचान… Read more

वक्त तो चला ही गया

*कविता* आगे का राह गुरु ने दिखाया समझाकर सभी को बताया कर संघर्ष ऐसा बात बताया सही समय ,सही अनुमान दिखाया जहाँ खेल-खेल में हँसना सिखे साथ रह-रह कर भी जीना सिखे जीवन की सच्ची सीढ़ी थी यादों में मस्त पीढ़ी थी लिखते हुए पढ़ना सिखे पढ़ते हुए हँसना सिखे दोस… Read more

चिंगारी को मिटाने ना दूँगा

*कविता* वक्त को रोक नहीं सकता हूँ, यादों को छोड़ नही सकता हूँ संसार को छोड़ सकता हूँ पर माँ का स्नेह रोक नही सकता हूँ वक्त कितना भी सताये दुनिया कितना हराये लक्ष्य का निशाना ना हटायेगें चिंगारी को आग ना बनायेगें साहस का पुकार सजायेगें संसार को हम बतायेग… Read more

खोया सा दिल है

*कविता* खोया सा डगर है ,खोया सा नर है खोया सा पल है,खोया सा मन है खोया सा दिल है,खोया सा प्यार है एक नर देखा ,बड़ा विचित्र देखा बड़ा बेचैन देखा ,आँखो नमी देखा हाथ में उसकी लाठी थी ना जाने उसकी साथी थी प्यासा था ,प्यार का दिवाना था घर उसका डगर था,मन उदास थ… Read more

संघर्ष से क्यों भागते हो?

*कविता* संघर्ष से क्यों  भागते हो? संघर्ष से क्यों नही लड़ते हो? भाग्य भी कुछ दिखाता है जीवन का संघर्ष बताता है उसकी हिम्मत भी दिखाता है उसके आगे अपनी राह बदला है जिंदगी का दर्पण मुझे दिखाता है वही डगर ,वही चाह मुझे बताताहै जिंदगी भी पतझड़ का झोका है जी… Read more

चिपके रहेगें पेड़ो के साथ रहेगें

*कविता* गरीबी के आँसू खुद ही पोछोगें खुद का सहारा लेकर खुद ही चलेगें किस्मत के आगे झुकेगें नही लकीर के पीछे रहेगें नही पेड़ो पर प्रहार को हम बचायेगें पेड़ों का मौन दर्द हम बतायेगें उसके गरीब रहकर हम दिखायेगें उसकी दर्द की भाषा हम बतायेगें विकास के साथ हत… Read more

वक्त तुझे बतायेगा

*कविता* लालच को जीवन में सजाया समय को समझ ना पाया उन्हें ये नही पता वक्त भी दोहराता है बीते हुए अतीत को भी बुलाता है वक्त का चक्र भी  उसे दिखाता है वक्त का इम्तिहान भी उसे सताता है मेरे हालत पर हँसकर दिखाया है मेरी गरीबी को तुने मजाक बनाया है वक्त को दोर… Read more

कविता वही है

*कविता* शाम वही है ,नये सवेरे की तलाश है जिंदगी वही है ,नये सफ़र की तलाश है कविता की राग हो,मेरी रागों में उसका साथ हो,मेरे हाथों में प्यार का इजहार हो,उसकी बातों में दिल का हाल हो,उसके हालों में उसका साथ हो,फुलों का गुलशन में उसके करीब हूँ,जन्नत की नजरों … Read more

ज़िंदगी अँधेरी हैं

*कविता*जिंदगी अँधेरी है ज़िंदगी अंधेरी है,उजाले की तलाश करता हूँ वक्त सोया है,उठाने की कोशिश करता हूँ ये राहो की डोर है,जो मुझे खिंच रही है मुझमे कुछ बात है,जो मुझे जोड़ रही है अपने छोड़ दिये है,उन्हे कुछ बताना चाहता हूँ समय के चक्र में ,उन्हें भी फँसाना चाह… Read more

सच्चाई की राग

*कविता* सच्चाई की बात सुनाता हूँ राहों की तहकी़कात सुनाता हूँ  लम्बे़ राग सुनाता हूँ स्त्री की बात सुनाता हूँ बढ़ता जा रहा है स्त्री पर अत्याचार बढ़ा जा रहा है,दरिंदो का अंहकार लड़कियों पर अत्याचार क्यों? दरिंदों पर पंख क्यों ? सोच उनकी गंदी क्यों? देश … Read more

जन्म लियो हो ,जीवन जीओ

*कविता* संघर्ष है जीना ही पड़ेगा खुशियाँ है लेना ही पड़ेगा जन्म लियो,जीवन जीओ जिंदगी को आराम में मत लाओ लालच के गुण  में मत लाओ किसी की बुराई भी मत बतलाओ जिंदगी को इरादे में लाओ संघर्ष किये हो,सफलता  में जाओगे हर साहस में धैर्य रखो हर बात में विचार रखो … Read more

शहर की परिभाषा

*कविता* शहर में भी जंग है जहाँ देखो,वही लोग तंग है यहाँ बादल भी दंग है यहाँ तन-मन में भी जंग है शहर बदला हालतों में षड्यंत्र बदला यंत्रों में लोग बदले गरीबों में धरती बदला बंजर में चेहरे मुरझाये से लगते है लंबे सताये से लगते है साँस जिनकी रुके,वह ठिक न… Read more

एक छोटी सी बात

*कविता* एक छोटी सी बात सुनाता हूँ यादों में एक राज़ सुनाता हूँ मुलाकात की डगर ऐसी थी वर्षों का मिलन जैसी थी मैं लौट गया बचपन की घड़ी में मैं लोट आया यादों की घड़ी में खू़ब मगन रहता था यादों में चमन बनकर खिल जाता था गरीबी रेखा भी थी ,ख़्वाबों की तकदीर भी … Read more

धरती को बदल डाला हम लोगों ने

*कविता* अंतर में अंतराल आया वक्त में इकरार आया यादों में प्रहार आया दिल में अहसास आया शहर को भाषण बना दिया जहाँ देखो,वहाँ शासन बना दिया विनाश को खुले पवन में लहरा दिया जहाँ देखो,वहाँ जंजीर बना दिया क्षिति को नरक बनाया ,हम लोगों ने जगह-जगह पेड़ो को रुलाय… Read more

कुछ सीखा हूँ

*कविता* मैं तब हारूँगा, जब मेरी साँस निकल जायेगा मैं तब-तक जागूँगा,जब-तक मैं सफल ना हो जाऊँ मैं तब-तक पिछा नही छोडू़ँगा,जब-तक मैं पा ना जाऊँ मैं तब-तक अंधेरे से टकराता रहूँगा,जब-तक उजाला ना मिल जाये कुछ सीखना है ,अनुभव से सिखों कुछ लिखना है,प्यार से लिखों क… Read more

कुछ बातें,समझा नही सकता

*कविता* विश्वास की कोई भाषा नही है,यहाँ सत्य को कोई पहचाना नही है,यहाँ महसुस करता हूँ, लोगों की जरुरतों को ध्यान रखता हूँ, जन्मदाता को छोड़ दिये संसार के लोग ,मैं किसके सहारे जीऊँगा बदल गया मेरा संसार ,मैं किसके सहारे रहूँगा गरीबों की कोई आवाज़ नही ,सुनता … Read more