Showing posts from July, 2019Show all

सरस्वती

*कविता* गुणों की जग-जननी हो,माँ आकाशा,पाताल,नक्षत्र,धरती,ये सभी आपके चरणों में समर्पित है अंधकार में भी प्रकाश डाल देती हो,माँ अनंत गुणों की जननी हो,माँ सभी गुणों में वास करती हो,माँ जो आपको पा नही सकता वह विफल हो सकता है आपकी उपासना में … Read more

ताड़ के पेड़ हमेशा ऊँचे दिखोगे

ताड़ का पेड़ हमेशा आपको ऊँचे नज़र  आयेगा बिहार में ताड़ के पेड़ की संख्या अधिक होती है ताड़ के पेड़ हमेशा खेतों के बिच में नही पाया जाता है  खेतों के आरी पर पाया पाया जाता है ,ताड़ के पेड़ लम्बा होता है तथा इसके पत्ते काफी चौड़ा होता है यह पेड़ों तक सीमित न… Read more

कृष्ण की जीवन

*कविता* प्रेम के आधार हो गोपियों के प्यारे हो वसुदेव के पुत्र हो  माँ देवकी की आठवीं संतान हो कान्हा का स्वर है बाँसुरी में मोहन है जाग उठे वृंदावन यही तो,स्वर्ण है कौरवो के विनाश हो पाण्डवों के सहायक हो अर्जुन के गुरु हो जनता के विधाता हो… Read more

कृषि

कृषि पर आधारित जानकारी,तथा किसान के उद्देश्य का महत्व  कृषि पर आधारित भारत की संपूर्ण अर्थव्यवस्था चलता है जिसके कारण भारत की अर्थव्यवस्था में किसी प्रकार कोई गिरावट नही होता है अंतरराष्ट्रीय अन्तर्गत पर सही अर्थव्यवस्था को पेश किया जाता है,किसी प्रकार से भारत की… Read more

मन की बात

मन की चाहत जब मैं दिल्ली में था,काफी ज्यादा पीड़ित हो गया था, मन हमेशा व्याकुल सा रहता था,वहाँ का वातावरण भी खराब हो गया हैं जिसके कारण लोगों को काफी मुसीबत का समाना करना पड़ा, क्योंकि जीवन जीने के लिए खुशी का बहुत महत्व है,तनाव में रहकर जीवन नही जिया जा सकता… Read more

गाँव के अन्दर

भारत का सौंदर्य कई वर्षो बाद गाँव में आया हूँ  गाँव के अन्दर अभी-भी प्राकृतिक सौंदर्य की झलक देखा मैंने हरे-भरे खेत देखने को मिले ,मानों ऐसा लग रहा था की प्राकृतिक सौंदर्य से काफी गहरा नाता हो,ऐसा लगने-लगा   गाँव में प्रवेश करते ह… Read more

राह भी अकेला

*कविता* जिंदगी भी बड़ी ओझल है कभी खुशियों का बहार तो कभी दुखोंं का पहाड़ कभी खुले में जीना तो कभी तनाई में रहना तो कभी ख़्वाबों में रहना तो कभी यादों में रहना थक चुके है, हम इस जीवन सें समझना चाहता हूँ इस जीवन को पर समझ नही पाता हूँ पल गुजरते जा जाते ह… Read more

जिंदगी भी ओझल हैं

*कविता* जिंदगी भी बड़ी ओझल है कभी खुशियों का बहार तो कभी दुखोंं का पहाड़ कभी खुले में जीना तो कभी तनाई में रहना तो कभी ख़्वाबों में रहना तो कभी यादों में रहना थक चुके है, हम इस जीवन सें समझना चाहता हूँ इस जीवन को पर समझ नही पाता हूँ पल गुजरते जा जाते ह… Read more

धरती की ओर एक झलक

*कविता* मनुष्य भुल चूके हैं, हम सब धरती पर ही रहते है, एक ऐसी धरती जिस पर गुलश़न का वसेरा हो, यदि कोई एक झलक, देख ले इस धरती को , वह इहलोक भुल जायेगा, समग्र-वैभव ,इसके-सामने फीका पड़ जायेगा मनुष्य की अभिलाषा पुरा क… Read more

खो गया हूँ

*शायरी* खो गया हूँ आपने आप से जिस पर चाहत रखा उसी ने, मुख फेर दिया आपने -आप से रचयिता:रामअवध Read more

प्रेम की राह

*कविता* प्रेम की राह श्रावण का दिन था मौसम का गुण था पहला मुलाकात था पहला मेरा प्यार था उसके सुहाने पल थे चेहरे पर मुस्कराहट थे आँखो में प्यार देखा दिलों में अरमान देखा क्या? उसके रंग-रुप थे क्या? उसकी चाहत थी क्या? उ… Read more

वर्षा हो रहा है

*कविता*वर्षा हो रहा है वर्षा हो रहा है श्रावण आ रहा है पुष्प महक उठे उपवन खिल उठे बूँदो को बरसने दो श्रावण को आने दो धरती को खिलने दो दूबो को उगने दो बगीचे को फूलने दो पंक्षियों को उड़ने दो आसमानोंं को झूमने दो श… Read more

कहाँ जीऊ,जिंदगी के पल

*कविता* मैं खड़ा था उस दुनिया में जहाँ भाग-दौड़ की राह थी वहाँ मन भी ,वीराना सा लगता है कहाँ जीऊ, शांति के पल भाग-दौड़ की दुनिया में थक चुके है,हम कहाँ जीऊ,किसी के दो पल वह पल भी ,वीराना सा लगता है मन भी भटक चुका… Read more

मेहनत करना भुल गये

*कविता* मेहनत करना भुल चुके है,लोग आरामो में,जीने लगे है,लोग कठिनाईयों से डर जाते है,लोग संकट का चरण  सहते है,लोग अगर आ पड़ती है,विपत्ति खुद को सिर झुका लेते शक्ति नही रही मानव के मस्तिष्क में सोच जिसकी बुलंद हो … Read more

चाँदनी रात है, दिवानी है

*कविता* चाँदनी रातों में सुहाने पल में किसी का आने का अहसास हुआ चाँदनी की जगमागहट आधी रातों मेंं हम भी,किसी के तनाई मेंं खड़े थे कब? तक सहा जाये अकेला पन की तनाई दिल तो करता है किसी के साथ चाँदनी रातों में सुहाने प… Read more

बेसहारा हो गयी

*कविता*   बेसहारा हो गई है गौ माता हमारी ना ही कही,खाने को सुन्दर सा दुब मिलता है सच में अनर्थ हो रहा है गौ माता जी का शहरों के पथ पर छोड़ देते लोग अकेला ,ओर बेसहारा रहती है सभी लोक भुल चुके है युगो-युगो तक म… Read more

निसर्ग है हम

*कविता*निसर्ग है हम माटी की सौंदर्य वक्ष को छू जाती है जीने की साँसे कक्ष में रुक आती है समीर में आकर वह खुल जाती है ज़िंदगी की अक्ष मेरी टूट जाती है चलते है,ये कदम नीर की बहाव में आती है,साँसे ज़िंदगी की बहार में कुदरत की आँगन को भूल मत जाना ज़िं… Read more

गौरैया

*कविता*गौरैया वृंद में तुम उड़ती थी घर में तुम बसती थी अँगना में लहराती थी मेघों को सहलाती थी गौरैया तुम ही घर की ताज थी ना दिखने पर धर की राज़ थी ईंटों से जुड़ी ज़िंदगी आयी थी गौरैया से हटी ज़िंदगी छायी हथी धीरे-धीरे गौरैया हटने लगी ईंटों … Read more

सृष्टि की देन

*कविता*सृष्टि की देन श्रावण के दिनों में कुदरत के सीनों में बहाव के साथ ये नीर चलती है लगाव के साथ ये वीर लड़ती है उड़ते परिंदों की उड़ान देखता हूँ ठहरते ज़िंदगी का वक्त लिखता हूँ दुर्भिक्ष की छाया,सौम्य में उतर आयी है ज़िंदगी की माया,मनुज में उभर आयी ह… Read more

कही दूर में डूबा हूँ

*कविता*कही दूर में डूबा हूँ कही दूर की सोच में कही दूर शुबा हूँ यादों की सोच में वही का नूर में डूबा हूँ वादे की तस्वीर मेरी चाहत पर रखी है कभी ना मिटने वाली ये राहत लिखी है जीने का वक्त भी बदल जायेगा लोगों का ढंग भी अकड़ जायेगा सीने में विपत्ति समा … Read more

लुप्त-गुप्त

*कविता*लुप्त-गुप्त तुषार की बूँद गिरी मेरी पलको पर हास बनी मेरी जान तेरी कदमों पर डहराने को आयी मेरी भाग्य मेरे पर लहर कर गयी मेरी शान तेरे वक्त पर तेरे ख़्वाब में खुद को खो दूँगा रश्क में नही,अभीष्ट में आऊँगा श्रावण की बूँदों मेरी चाह आयेगी तेरी राहों में… Read more

बीहड़ कहर चुकी है

*कविता*बीहड़ कहर चुकी है मानव की धारा बहक चुकी है भूमंडल पर वह कहर चुकी है दानव की दौड़ में मानव भाग चुकी है बीहड़ की काया हटाने निकल चुकी है कह़र कर ये धरती अब बोल चुकी सुन कर ये मानव अब ढोल चुकी विपत्ति सहती है नर को बता चुकी नयनों की धारा अपनी बहा चुकी … Read more

पवित्र प्रेम की ओर चले

"रचयिता:रामअवध मेरे विचार " जीवन में प्रत्येक मनुष्य को,पवित्र प्रेम का अनुभव हो ही जाता हैं, चाहे वह माँ-बाप से प्रेम करें, या जीव-जंतु से लेकिन प्रेम हो ही जाता हैं,लेकिन जहाँँ पर प्रेम है वहाँ पर परमात्मा है, प्रेम का व… Read more