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कवि ओर नदियाँ है


एक कवि नदियों के

पास बैठा हुआ था,
देख रहा था,नदियों का लहर
कवि नें नदियों से कहा
क्या? संगम है
तेरा ओर नदियों का,
कैसा? है,संगम

नदियाँ कहती है,कवि से

कवि ओर कविता का संगम,
आत्मा ओर परमात्मा का संगम,
ऐसा है,नदियों ओर लहरों का संगम

कवि सोच में डुब गया,

कवि कहने लग गया
नदियों सेंं,
नदियाँ लहर से कहती है
तेरा मेरा कैसा? संगम
लहर नदियाँ से कहता है
जैसा,भूमिपुत्र ओर धरती का संगम

रचयिता:रामअवध




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