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सरस्वती

*कविता*

गुणों की जग-जननी हो,माँ
आकाशा,पाताल,नक्षत्र,धरती,ये
सभी आपके चरणों में समर्पित है

अंधकार में भी
प्रकाश डाल देती हो,माँ
अनंत गुणों की जननी हो,माँ
सभी गुणों में वास करती हो,माँ

जो आपको पा नही सकता
वह विफल हो सकता है
आपकी उपासना में
अनंत गुणों का सागर है

आपके शरण में ,जो आये
जीवन में सफल हो जाये
विधा,संगीत,वीणा,इनमें
वास करती हो,माँ

अंधकार के पथ में भी
प्रकाश दिखा देती हो,माँ
गुणों का अनंत 
सागर हो माँ

सभी गुणों में आप हो
आपको गुणों हम सब है
सभी में आप हो
आप में हम सब है

रचयिता:रामअवध


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