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गौरैया रानी

*कविता*


छोटी सी प्यारी सी गौरैया
 जाने,कहाँ विलुप्त हो गई
घर के आँगन में,
चहल-पहल करा करती थी
थी हमारे,भारत की शान
घरो के सज्जे पर
हुआ करता था,उसका बसेरा
जब से,यंत्रों का दानव आया
जीते-जीत मर गई
छोटी सी,प्यारी सी गौरैया
आँगन की ताज थी,गौरैया
तकनीकों का विकास हुआ
गौरैया का प्राण गया
क्या?गलती थी
नन्ही सी गौरैया की
भारत के आँगन में
खेला-कुदा करती थी
अब तो,भारत भी हुआ बेघर
कुछ यादे जुड़ी थी
नन्ही सी गौरैया के साथ
चाहत तो,बहुत थी
देखने को, अब कुछ यादे रह गयी
विकास के चक्र में
हम सब बहुत कुछ खोये है
बीते हुए पल ही
याद बनकर रह जायेगा
यंत्रों का युग आया
प्राणियों का संकट आया
जल्दी से नही रोका गया
धरती भी विलुप्त हो जायेगी

रचयिता:रामअवध



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