पवित्र प्रेम की ओर चले





"रचयिता:रामअवध

मेरे विचार "
जीवन में प्रत्येक मनुष्य को,पवित्र प्रेम का अनुभव हो ही जाता हैं, चाहे वह माँ-बाप से प्रेम करें, या जीव-जंतु से लेकिन प्रेम हो ही जाता हैं,लेकिन जहाँँ पर प्रेम है वहाँ पर परमात्मा है, प्रेम का विशाल रुप हैं जिसे समझना कठिन हैं,ईश्वर भी सच्चे प्रेम से विमुख नही होते , लेकिन प्रेम की
ओर आकर्षित हो जाते हैं , अगर किसी भी मनुष्य को सच्चा प्रेम होता है,तो जीवन के अंतिम समय तक वह प्रेम करता- रहता है, तो उसे प्रेम का अनुभव हो जाता हैं, उस मनुष्य को प्रेम मिल जाता हैं,समझों जीवन में उसने स्वर्ग की सभी खुशियाँ प्राप्त कर लिया हो ,प्रेम करने से श्रद्धा – भाव प्रकट होता है, जिसे मस्तिष्क की घृणा उत्पन्न नही होती हैं,जिसे जागतिक की ओर आकर्षित हो जाता हैं, उसे ईश्वर प्राप्त हो जाते है, और वह परमात्मा का ही एक अंग जाता हैं, लेकिन कुछ शैतान भी मनुष्य होते है जिन्हे प्रेम से कोई मतलब नही होता,प्रेम करने वालो को,
हमेशा कुछ लोग ने दुखी करते -रहते है जिन्हे जो हमेशा नरक मेंं कष्ट सहते – रहते
है ,इसीलिए हमेशा प्रेम करते रहो जिसे जीवन में कोई कष्ट न हो,स्वर्ग की सभी खुशियो का आनंद ले सके ओर शांतिपुर्वक जीवन व्यक्त करे ,भौतिक जीवन से हट कर रहे, ईश्वर की ओर संकेत करे और आपका हमेशा कलियान हो सके/

रचयिता:रामअवध

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