वर्षा हो रहा है


*कविता*वर्षा हो रहा है

वर्षा हो रहा है
श्रावण आ रहा है
पुष्प महक उठे
उपवन खिल उठे
बूँदो को बरसने दो
श्रावण को आने दो
धरती को खिलने दो
दूबो को उगने दो
बगीचे को फूलने दो
पंक्षियों को उड़ने दो
आसमानोंं को झूमने दो
श्रावण को बरसने दो
बादल बरस रहे है
बूँदे गिर रहे है
गगन ठहर रहे है
वर्षा हो रहे है
प्राणियों को राहत मिली
उपवनों की प्यास बुझी
फसलों में लहर उठे
खेतीहर भी झूम उठे
श्रावण की लहर छाये
शीतल हवाओं का झोंका आये
मन में खुशियों का बहार लाये
जीने के सुहाने पल बताये

रचयिता:रामअवध

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