मेहनत करना भुल गये



*कविता*


मेहनत करना भुल चुके है,लोग
आरामो में,जीने लगे है,लोग
कठिनाईयों से डर जाते है,लोग
संकट का चरण  सहते है,लोग
अगर आ पड़ती है,विपत्ति
खुद को सिर झुका लेते
शक्ति नही रही
मानव के मस्तिष्क में
सोच जिसकी बुलंद हो
वह सहन कर लेता, विपत्तियों को
याद करो ,इतिहास के लोगो को
शिखर का छाती चीर कर
पथ बना दिया
क्या? रक्त के अंगारे थे
खुद को जला दिया
मेहनत के अंगारे में
मेहनत के लगन में
खुशियों के पल छोड़ देते है
जो कर सके
शिखर का शिकार
वह वीर नज़र नही आता है
वीर कहे, या कायर कहे
मेहनत करना क्या? जाने
डरे -डरे से,लगते है,लोग

रचयिता:रामअवध

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