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चाँदनी रात है, दिवानी है



*कविता*


चाँदनी रातों में
सुहाने पल में
किसी का आने का अहसास हुआ
चाँदनी की जगमागहट
आधी रातों मेंं
हम भी,किसी के तनाई मेंं खड़े थे
कब? तक सहा जाये
अकेला पन की तनाई
दिल तो करता है
किसी के साथ
चाँदनी रातों में
सुहाने पल का
आनंद ले सकूँ
चाँदनी के प्रकाश में
प्रेम के कण नज़र आते है
किसी का जीवन में
आने का संकेत है
नज़र आता है
किसी के सुहाने पल का
इंतज़ार कर रहे है
पल भी क्या? पल आयेगें
शीतल हवाओं में
प्रेम के गुण लायेगी
चाँदनी रातों में
चाँदनी के प्रकाश में
चाँदनी के गुणों से
कमल के पुष्प खिल उठे
सरोवर में ओस के
बादल घाय गये
ना जाने, तनाई की रात
कब? खत्म होगी
चाँदनी रातों में
शीतल हवाओ में
अंग-अंग सिकुड़ गये
सुहाने पलों में
अकेले खड़े थे,तनाई में

रचयिता:रामअवध


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