प्रेम की राह

*कविता* प्रेम की राह

श्रावण का दिन था
मौसम का गुण था
पहला मुलाकात था
पहला मेरा प्यार था
उसके सुहाने पल थे
चेहरे पर मुस्कराहट थे
आँखो में प्यार देखा
दिलों में अरमान देखा
क्या? उसके रंग-रुप थे
क्या? उसकी चाहत थी
क्या? उसकी आकृति थी
क्या? उसके अरमान थे
वर्षो की यादे
अब जाने-लगी
क्या? खूब बीते पल थे
जो अब आने लगी
था,वह बचपन का कथा
पर यादोंं से भरा था
उसके आने से
उपवन भी खिल उठे
उसके जाने से
पतझंड़ आ जाये
ऐसा लगने-लगा था

खूब चाहत थी उन बातों पर
खूब राहत थी उन दिनों पर
सच्चाई कही ,छिपती नही
अच्छाई कही,दिखती नही

रचयिता:रामअवध

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