Showing posts from September, 2019Show all

किसी ने कहा

*कविता*किसी ने कहा किसी ने कहा, चाँद बड़ा प्यारा है जग कितना न्यारा है मैं उसके लिए गरीब हूँ पर उसके करीब हूँ चेहरा दिखाया करती थी ऐसा प्रमाण बताया करती थी जिंदगी के हर पल में साथ रहूँगी जीवन के हर मोड़ पर साथ जुडू़गी खुशियाँ साथ लेकर आऊँगी जीवन की शु… Read more

विचार

*कविता* जिंदगी भी बड़ी ओझल सी लगती है कभी खुशियों का बहार तो कभी  दुखो का पहाड़ कभी खुलेपन में जीना तो कभी तनाई मे रहना कैसा? चक्र है जीवन का कभी ख्वाबों में रहता हूँ तो कभी जीवन में आ जाता हूँ समझ में नही आता ,जीवन का क्या? प्रक्रिया है थक चुके है जीवन स… Read more

मजदूर

*कविता*मजदूर पल-भर में पसीने का गिरना क्षण-भर में अंगों का टूटना सूरज के साथ तापते है गुज़र-बस़र के साथ रहते है मजबूरियाँ साथ लेकर चलते है तजुर्बा साथ लेकर बसते है यादों को बाँध कर हम रखते है उन्हीं यादों के सहारे हम जीते है घर की डोर से बंध जाते है कम … Read more

रूठ गया हूँ

"Author Poems:Ramavadh रचयिता:रामअवध kavitagelaxy.in कविता ही कविता" जिंदगी से रूठ गया हूँ ना जाने क्यों? टूट सा गया हूँ वक्त भी अनजान है लोग भी बईमान है चेहरे भी अब मुस्कुराती नही जिंदगी भी अब लहराती नही खुब बीते पल अब बताती है ज़िंदगी के पल … Read more

निकल पड़े

*कविता*निकल पड़े निकल पड़े, किसी के पैगामें  में बिखर गये,किसी के जमानें में छोड़ चले ,अतीत को मोड़ चले, व्यतीत को अंधेरियाँ रात है, रास्ते ं में विराट है सवेरा है, पर एक पथ पर निकट है समुंद्र सी लहर है ,मुझमें किनारा सा ठहर है,मुझमें जमा़ना भी क्या? तकद… Read more

चाँद रुठ गया

*कविता* चाँद पर उतरना चाहते थे लम्बा इतिहास बनाना चाहते थे लम्बा सफ़र बनकर आये थे वर्षों का सपना साथ लाये थे करोड़ो की आशा साथ लाये थे मेहनत की लकीरे भी साथ लाये थे रूठ गया ,चाँद का मुखड़ा टूट गया ,दिल का टुकड़ा दौराऊंगा इतिहास को,फिर लौटूँगा चाँद पर फि… Read more

जल

*कविता* दिन पर दिन घट रहा हूँ जल चक्र में फँस रहा हूँ मनुज की सोच देखो जल की कीमत की रेख देखो लोग समझते नही ,जल की कीमत को सब समझते है,बिजली की कीमत को मानव जीवन को समझों जल का अहसास ना होने पर समझों यूँ ही नही बहा दो जल को जल का महत्व को सम… Read more

सपना

*कविता*सपना कुछ सपना है,जो आँखो पर सजाया हूँ कुछ पाना है, जो दिलों पर बसाया हूँ कुछ विपत्तियाँ है,जो जीवन में सताया है कुछ अपने है,जो जीवन में चलना सीखाया है दिन विराना लगता है रात सौहाना लगता है चाँद देखता हूँ सपनों में दिन होता है अपनों में कुछ सपने है… Read more