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रूठ गया हूँ

"Author Poems:Ramavadh
रचयिता:रामअवध
kavitagelaxy.in
कविता ही कविता"

जिंदगी से रूठ गया हूँ
ना जाने क्यों? टूट सा गया हूँ
वक्त भी अनजान है
लोग भी बईमान है

चेहरे भी अब मुस्कुराती नही
जिंदगी भी अब लहराती नही
खुब बीते पल अब बताती है
ज़िंदगी के पल अब मुझे सताती है

आँखों पर चमक नही
जिंदगी में दमक नही

अकेले में कही ठहर जाता हूँ
जिंदगी में कही बस जाता हूँ
चतुर की चतुराई देखा हूँ
भले की भलाई देखा हूँ

कही तो पल मैंने खोया है
पल की यादों कही तो सोया है
किसी को पुकार रहा हूँ
पल को यूँ ही उड़ा रहा हूँ

वक्त के साथ चल रहा हूँ
जिंदगी में कुछ कर रहा हूँ
सब्र रखो,या लिहाज़ रखो
मन में एक प्रेम रखो

रचयिता:रामअवध


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