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माँ

*कविता*माँ

माँ बचपन की छाया है
माँ आँचल की माया है
माँ के अंग से हम है
माँ की ममता में हम है

माँ का चरण स्वर्ग कहलाता है
माँ का प्यार अमर कहलाता है
माँ का कर्ज चुका नही सकते
माँ का दर्द छुपा नही सकते

माँ की करुणा कभी खत्म नही होती
माँ का प्यार कभी नम्र नही होती
माँ का चरण दिलों में सज जाता है
माँ की मुर्ति आँखों पर बस जाता है

माँ से कितनी भी दुरियाँ बना सकोगें
माँ जैसा प्यार कभी नही पा सकोगें

माँ की चाहत होती है
बच्चों पर अमानत होती है
माँ का प्यार मिले
जीवन का आधार मिले

माँ बूढ़ी होकर ममता को छिपा लेती है
बेटे की चाहत में आँसू बहा लेती है
माँ की दुखों को सहन नही कर सकता हूँ
माँ की ममता को कभी भूल नही सकता हूँ

वक्ष में नयनों की धारा बहती है
यही तो माँ की ममता कहलाती है
माँ की आँखों से आँसू बहता है
यही तो ममता का नाज कहता है

रचयिता:रामअवध

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