विचार

*कविता*

जिंदगी भी बड़ी ओझल सी लगती है
कभी खुशियों का बहार तो कभी  दुखो का पहाड़
कभी खुलेपन में जीना तो कभी तनाई मे रहना

कैसा? चक्र है जीवन का
कभी ख्वाबों में रहता हूँ
तो कभी जीवन में आ जाता हूँ
समझ में नही आता ,जीवन का क्या? प्रक्रिया है

थक चुके है जीवन से
कोई अलौकिक जीवन मे़ रहता है
तो कोई लौकिक में

जिंदगी भी तीव्र गति से चलती रहती है
किसी का चेहरा खिला हुआ रहता है
तो किसी का मुरझाया हुआ
ना जाने इस जीवन का क्या? रहस्य है


रचयिता:रामअवध

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