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भ्रूण हत्या
हिमगिरी से निकलती हूँ,सागर में गिरती हूँ
तुम जागों
कोई नही हैं
मत बाँधों मुझे
करवा चौथ
विधाता
हँसना सिखो
शायरी
पुष्प की सुन्दरता
लोगों का दर्पण
भ्रष्टाचार
भौंर
शायरी
शायरी
सफ़र
माँ,जग हैं