Showing posts from October, 2019Show all

भ्रूण हत्या

*कविता* मत निकालों मुझे कोख से,मुझे रहने दो मत निकालों अपनी जिंदगी से,मुझे खिलने दो मत मारो मुझे,मुझे भी जीने दो आपके अंगो में ही मुझे रहने दो माँ, मैं दुनियाँ देखना चाहती हूँ आपके करीब रहना चाहती हूँ माँ ,मैं एक कली हूँ जो खिली नही हूँ मैं आपकी लाडली हू… Read more

हिमगिरी से निकलती हूँ,सागर में गिरती हूँ

*कविता* हिमगिरी से निकलती हूँ बादलों के साथ चलती हूँ हवाओं के साथ मुड़ती हूँ लम्बा सफ़र करती हूँ दिशा का मुझे ज्ञान नही रास्ता का मुझे पहचान नही मुझे पहचान सके,किसी में परख नही ठहर जाऊं,ऐसी मेरी माया नही सुख ना सके मेरी धार रूक ना सके मेरी लहर अम्बर से… Read more

तुम जागों

*कविता* झोपड़ी में रहकर ताज बनूँगा नंगे पाँव चलकर इतिहास लिखूँगा  ऐसा भी इंसान बनूँगा किसी के प्रतीक प्यार लिखूँगा ऐसा भी इम्तिहान लिखूँगा तड़प-तड़प कर ,जीना सिखूँगा तप-तप कर ,रहना सिखूँगा खुश रखो,ऐसा इंसान बनो तुम बचाओ देश को,ऐसा जन बनो तुम खुले का आक… Read more

कोई नही हैं

*कविता* अकेला चल पड़ा हूँ यादों को छोड़ चला हूँ खुद में ही खो गया हूँ खुद को मोड़ चला हूँ पढ़ना- लिखना भूल गया हूँ बातें करना भी भूल गया हूँ कुछ यादों को भी भूल गया हूँ कुछ सपनों में  टूट गया हूँ किसी वादें पर बिखर गया हूँ माँ-बाप की चरणों में झुक गया हू… Read more

मत बाँधों मुझे

*कविता* मत बाँधो मुझे ,मैं बिगड़ जाऊँगा मत छोड़ो मुझे,मैं बिखर जाऊँगा दानव की बुराईयों से मत बाँधो  मुझे जीवन में किसी के सहारे भी मत बाँधो मुझे उन्हे भी जीने दो,खुले बन्धन में मुझे भी जीने दो,उसके मंथन में नजरों में ही उसने बाँध दिया मुझे नजरों में ही उसन… Read more

करवा चौथ

*कविता* सोलह शृंगार की कठपुतली बनी हूँ ,मैं आज किसी के इंतजार में बेचैनी बनी हूँ मैं आज किसी प्रेमी का प्रेमिका बनी हूँ मैं आज किसी मुखड़े के लिए चाँदनी बनी हूँ मैं आज किसी के सजावट का रूप बनी हूँ मैं आज जब-तक मेरी साँसों में तेरी महक हो तब-तक तेरी आँखों मे… Read more

विधाता

*कविता*विधाता देख ना पाया  विधाता को ज़िक्र करता हूँ उल्लासा को भूमंडल भी प्यारा लगता है ईश्वर भी न्यारा लगता है ना ही हिंसा में हूँ,ना ही संहिता में हूँ ना ही मैं रक्त के अंगो में हूँ बस आत्मा के वक्त में हूँ ना मै ं मंत्रों में हूँ,ना मैं द्वार में हूँ … Read more

हँसना सिखो

*कविता* लाखों बार मुसीबत आये, लाखों बार हँसना सिखों लाखों बार टूट गये, लाखों बार भी जुड़कर हँसना सिखों दर्द भी छाती में चुभता है,हँस जाओ तो छिप जाता है जीवन भी खुशियों में लुभाता है,यही जीवन को तहकता है जीवन की तकदीर यही है, जीवन बीत जाये फ़क़ीर यही है जीवन… Read more

शायरी

*शायरी* किसी के रूठ जाने से दिलदार हुआ किसी के टूट जाने पर खुद में ही बेहाल हुआ उस ज़माने से भी कह दो , मुझे छोड़ दो उस माँ से भी कह दो,मुझे भी मोड़ दे मान लिया, मेरी कुसूर ही ऐसी है जिसे पाया ,उसी ने मुँह फेर लिया आज-कल  कुछ बात ऐसी है, जिसे पाया,उसमे… Read more

पुष्प की सुन्दरता

*कविता* सुन्दर सा रंग है,रंगों में रंगीन है सुन्दर सी आकृति है,लोगों पर रंगहीन है हवा के साथ झूम रही हो लोगों के साथ घूम रही हो सुर्य के प्रकाश में खिल जाऊँगी वर्षा की बूँदे पर लहर जाऊँगी श्रावण में महक कर उठ जाऊँगी लोगों पर मनोहारी होकर उड़ जाऊँगी एक प्य… Read more

लोगों का दर्पण

*कविता* आओ मिलकर,सुन्दर इतिहास बनाओ जाओ जुड़कर,सुन्दर समाज बनाओ भारत में रहकर कुछ करके दिखाओ माँ-बाप की आशा है,कुछ बनकर दिखाओ समय की गहराई में मत जाओ,कुछ पा ना सकोगें अपनी ही गहराई में जाओ,कुछ ला सकोगे हम अपना दर्पण खुद ही बन जायेगें समाज बदल जाये,ऐसा अर्प… Read more

भ्रष्टाचार

*कविता* न्यान मांगने गया,तो अन्यान मिला हक मांगने गया,तो हकदार मिला जहाँ-जहाँ गया,वहाँ-वहाँ  मिला भटक-भटक कर गया,अटक -अटक कर आया कितने गिर चुके है लोग कितने भ्रष्ट गये है लोग देश इतना नम्र क्यों? लोग इतने सब्र क्यों? कौन? समझाये इन दानव को कौन? बचाये इन… Read more

भौंर

प्राकृतिक                          सवेरा जब नींद खुला तो चिड़ियों की चहल-पहल था ,सुबह की किरणों में गजब सी रोशनी थी ,मन भी देखकर अन्दर से कुछ पल के लिए खुशी सा होने लगा , मन भी कुछ पलों के लिए बिलकुल शांत सा हो गया था ,हवाओं में नमी के गुण बिछे थे ठन्डी हवा… Read more

शायरी

*शायरी* माई,मैं उस ज़माने गुज़र रहा था जिस ज़माने में आपकी याद सताई माई,मैं उस ज़माने से भी टकरा गया जिस ज़माने में आपकी याद सताई माई,मैं आपकी चरणों का धुल बनकर आया दरबार जाने के लिए,मैं फ़क़ीर बनकर आया मैं उस पल में खो गया था,जिस पल में माँ का ख्वाब आया … Read more

शायरी

*शायरी* अकेला रहकर भी अजनबी हूँ साथ रह जाऊं,तो सुनामी हूँ चलता हूँ किसी यादों में ठहरता हूँ, किसी वादों मे लम्बे समय तक ,किसी का इन्तजार किया? उसी की उम्मीद पर, मुझे जीने का इन्तजार आया किसी ने हाथ छोड़ा किसी ने साथ भी छोड़ा समुंद्र से मैंने कहा ,मुझे  क… Read more

सफ़र

*कविता* हवा का झोका आया कानों में सनसनाहट लाया मन में एक लहर सी उठी सफ़र में एक क़हर भी उठी आँधी थी,या वबंडर था लहर थी,या क़हर था रास्ता थी,या भहर था धूप में छाया था,ज्वाला था सफ़र में सफलता मिली मेहनत में हौसला मिली तेज रफ्तार से चल रहा था अदल-बदल दृ… Read more

माँ

*कविता*माँ माँ बचपन की छाया है माँ आँचल की माया है माँ के अंग से हम है माँ की ममता में हम है माँ का चरण स्वर्ग कहलाता है माँ का प्यार अमर कहलाता है माँ का कर्ज चुका नही सकते माँ का दर्द छुपा नही सकते माँ की करुणा कभी खत्म नही होती माँ का प्यार कभी नम्र … Read more