सफ़र

*कविता*

हवा का झोका आया
कानों में सनसनाहट लाया
मन में एक लहर सी उठी
सफ़र में एक क़हर भी उठी

आँधी थी,या वबंडर था
लहर थी,या क़हर था
रास्ता थी,या भहर था
धूप में छाया था,ज्वाला था

सफ़र में सफलता मिली
मेहनत में हौसला मिली
तेज रफ्तार से चल रहा था
अदल-बदल दृश्य देख रहा था

हरे-भरे देश हमारे
सब के अन्दर देश हमारा
जीवन के पथ पर चल रहा हूँ
जीवन के पथ रुक रहा हूँ

हरियाली में गुजर रहा हूँ
हरियाली में ठहर रहा हूँ
जीवन भी एक सफ़र है
सफ़र के साथ जीना भी जीवन है

रचयिता:रामअवध



0 Comments