पुष्प की सुन्दरता

*कविता*

सुन्दर सा रंग है,रंगों में रंगीन है
सुन्दर सी आकृति है,लोगों पर रंगहीन है
हवा के साथ झूम रही हो
लोगों के साथ घूम रही हो

सुर्य के प्रकाश में खिल जाऊँगी
वर्षा की बूँदे पर लहर जाऊँगी
श्रावण में महक कर उठ जाऊँगी
लोगों पर मनोहारी होकर उड़ जाऊँगी
एक प्यारी सी कली है
लोगों पर बन्ध सी गई  है

तितलियाँ भी रंगों में रंगीन हो रही है
पंख फैला कर उड़ान भर रही है
रसों को कन्ठों में दबा कर भर रही है
सुन्दर उसके पंख प्यारे,
आकाश  उसके पंख न्यारे

सुन्दर सी फुलवारी की महक
सुन्दर सी  वनों की महक
हरे-भरे पौधो ं का झुँड
नन्हे-कलियों का झुँड

पक्षियों का कतार है यही
फुलों का गुलश़न है,यही
यही,सुगंधों का बसेरा
यही ,लोगों का सवेरा

रंगीन तितलियों की बरात है
रंगीन कलियों की कतार है

रचयिता:रामअवध


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