शायरी

*शायरी*

किसी के रूठ जाने से
दिलदार हुआ
किसी के टूट जाने पर
खुद में ही बेहाल हुआ

उस ज़माने से भी कह दो , मुझे छोड़ दो
उस माँ से भी कह दो,मुझे भी मोड़ दे

मान लिया, मेरी कुसूर ही ऐसी है
जिसे पाया ,उसी ने मुँह फेर लिया

आज-कल  कुछ बात ऐसी है,
जिसे पाया,उसमें कुछ बात ऐसी
ना जाने कहाँ ?खो गई उसकी सूरत
ढूँढता इन गलियों उसकी मूरत

ये चाँद-सितारे की महिमा भी बेहाल लगती है
उसके ना होने पर जिंदगी भी तहम नही हो पाती
उसके आ जाने पर ,
जीवन भी एक तकदीर ले आती है
उसके जाने पर,
पतझड़ भी निचोड़ ले आती है


रचयिता:रामअवध


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