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हँसना सिखो

*कविता*

लाखों बार मुसीबत आये, लाखों बार हँसना सिखों
लाखों बार टूट गये, लाखों बार भी जुड़कर हँसना सिखों
दर्द भी छाती में चुभता है,हँस जाओ तो छिप जाता है
जीवन भी खुशियों में लुभाता है,यही जीवन को तहकता है

जीवन की तकदीर यही है,
जीवन बीत जाये फ़क़ीर यही है
जीवन में दुख है, हँसकर ग्रहण करो
जीवन में सुख है,रहकर स्वीकार करो

रो-रो कर टलना सिखों
हँस-हँस कर जीना सिखों
जीवन बहुत भी बड़ी  है
जहाँ जाओ ,वही पड़ी है

गुरु जनों से सिखों ,ज्ञान की बातें
जीवन का सही मार्ग -दर्शन दिखाते है

लाखो बार पड़ेशानियां आयेगी
लाखो बार मुलाकात करेगी
लाखो बार आपको सतायेगी
लाखों बार हँसकर टलेगी

कष्ट लक्ष्य की पकड़ है
नष्ट जीवन की बिगाड़ है
मैं भी बड़ा घबराया हूँ
पर खुद को बचाया हूँ

इतिहास ऐसे नही बना देते लोग
भविष्य को ऐसे नही बना देते लोग

रचयिता:रामअवध


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