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तुम जागों


झोपड़ी में रहकर ताज बनूँगा
नंगे पाँव चलकर इतिहास लिखूँगा
 ऐसा भी इंसान बनूँगा
किसी के प्रतीक प्यार लिखूँगा
ऐसा भी इम्तिहान लिखूँगा
तड़प-तड़प कर ,जीना सिखूँगा
तप-तप कर ,रहना सिखूँगा

खुश रखो,ऐसा इंसान बनो तुम
बचाओ देश को,ऐसा जन बनो तुम
खुले का आकाश,बादल बनो तुम
दुनिया तुम्हें रोकेगी
कुछ सलाह तुम्हें बतायेगी

अंधरे में,जुगनू बनकर उड़ जाओ तुम
सागर में,नौका बनकर निकल जाओ तुम
चट्टानों से,टकरा चट्टान बन जाओ तुम
किचड़ मे,जाकर कमल बन जाओ तुम

ठोकर लगेगा तो,संभलना सिखूँगा
गिर गया तो,उठकर चलना सिखूँगा
घर को त्याग दूँगा
खुद को मोड़ लूँगा

दीप बनकर तुम जलों
तप जाओ,ऐसा इंसान बनो
कष्ट का विनाश बनो तुम
ह्र्दय का प्यार बनो तुम

दीप की ज्योत तुम लाओ
ज्ञान की ज्योत भी तुम लाओ
खुद की ज्योत तुम बनो
खुद का प्रकाश भी तुम बनो

हजार दीप जला कर ज्ञान नही ला सकते
ज्ञान की ज्योत जला कर, ज्ञान ला सकते हो










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