भ्रूण हत्या

*कविता*

मत निकालों मुझे कोख से,मुझे रहने दो
मत निकालों अपनी जिंदगी से,मुझे खिलने दो
मत मारो मुझे,मुझे भी जीने दो
आपके अंगो में ही मुझे रहने दो

माँ, मैं दुनियाँ देखना चाहती हूँ
आपके करीब रहना चाहती हूँ
माँ ,मैं एक कली हूँ
जो खिली नही हूँ

मैं आपकी लाडली हूँ
मैं आपकी प्यारी हूँ
मैं आपकी निशानी हूँ
मैं आपकी हवाली हूँ

किसी की बात सुन गई
अन्दर से आवाज़ आई
माँ,सुनकर हैरान रह गई
सुना रही थी ,आपनी अभिलाषा
गुन-गुना रही थी अपनी भाषा
कह रही थी,माँ,मुझे मत मारो

माँ को बातो पर एहसास हुआ
उसके जीने पर वरदान हुआ
समझ पाई ,उसकी अभिलाषा
देख लिया ,उसकी भाषा

समाज के कुछ लोग होते है,ऐसे
जो मजबुर करते है उन बातों से
मत बोलो मेरी माँ को, मुझे जीने दो
डराओ मत मेरी माँ को,उन्हें छिपाने दो
मत रुलाओ मेरी माँ को,उन्हें बसने दो
मत भागाओ मेरी माँ को,उन्हें ठहरने दो
मुझे भी रहने दो,माँ के कोख पलने दो

कौन-सी ?जंजीर से बँन्धू उन्हें
जो याद रखो माँ का  फ़िक्र उन्हें

माँ ,मै आपकी पहचान बनूँगी
माँ,मैं आपके करीब रहूँगी
माँ, मैं आपका ध्यान रखूँगी
माँ, मैं आपकी दुनिया बनूँगी

रचयिता:रामअवध





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