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शायरी

*शायरी*

माई,मैं उस ज़माने गुज़र रहा था
जिस ज़माने में आपकी याद सताई
माई,मैं उस ज़माने से भी टकरा गया
जिस ज़माने में आपकी याद सताई

माई,मैं आपकी चरणों का धुल बनकर आया
दरबार जाने के लिए,मैं फ़क़ीर बनकर आया
मैं उस पल में खो गया था,जिस पल में माँ का ख्वाब आया

माई,मैं आपके शरण में आकर,जहान भुल गया
माई,मैं तरण पार करके ,आपके  दरबार में झूल गया
कैसी माया है?,जो  आपको पुकार ना सके
कैसी दया है,?जो आपको पुज सके ,पा सके

रचयिता:रामअवध

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