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भौंर

    प्राकृतिक    

                     सवेरा

जब नींद खुला तो चिड़ियों की चहल-पहल था ,सुबह की किरणों में गजब सी रोशनी थी ,मन भी देखकर अन्दर से कुछ पल के लिए खुशी सा होने लगा , मन भी कुछ पलों के लिए बिलकुल शांत सा हो गया था ,हवाओं में नमी के गुण बिछे थे ठन्डी हवाओं का झोका से शरीर भी ठन्डा हो जाता है सवेरा का दृश्य देखकर मानों की चारों ओर प्राकृतिक का ही दृश्य दिख रहा है 

खेतों में दूबों पर नमी के ओंस बिछे थे?

गाँव-घर के लोग हमेशा भौर होते ही खेतों में घुमने निकल पड़ते है काफी देर तक खेतों ठहरतें है क्योंकि फसल की देख-रेख भी कर देते है ,भारत देश कृषि पर निर्भर है क्यों -भारत के अन्दर तरह -तरह के खेतों में तरह के फसल ऊंगाये जाते है




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