Showing posts from November, 2019Show all

छोटा सा गाँव है मेरा

*कविता* बादलों का अंधेरा कब?-तक रहेगा तुफानों का डगेरा कब?-तक रोकेगा मंजिल का दरवाजा कभी तो खुलेगा कभी तो मेरा नाम इतिहास में लिखेगा कभी तो मेरा ही चाँद खिलेगा बहुत छोटी सी पहचान है मेरा छोटा सा गाँव ,छोटा सा नाम है मेरा लम्बा आशा है मेरे दिल में लम्बा … Read more

वक्त के शिकन्जे में आकर रोया हूँ

*कविता* मेरे वक्त की लकीर यही है जग में मेरी तकदीर यही है अंधेरे की आहट में रात भर जागना सवेरे की किरणों नयी उम्मीद लेकर भागना मौन गलियाँ भी कुछ कहती नही लोगों की सनसनाहटे भी कुछ बोलती नही शीतल हवाओं का भी सताना कंबल की रूह में भी काँपना जागे पलको में … Read more

मैं अब जागा हूँ

*कविता* मैं अब जागा हूँ वर्षों को त्यागा हूँ वर्षों की माया हूँ देश की छाया हूँ अपने वक्त में लाया हूँ कुदरत को पाया हूँ समय ढलता जा रहा है अंधेरा देखो आ रहा है नया सवेरा आयेगा अंधेरो को भागायेगा नयी उम्मीद की नयी चाँद होगा वक्त की लहरों में नयी पहचान… Read more

वक्त तो चला ही गया

*कविता* आगे का राह गुरु ने दिखाया समझाकर सभी को बताया कर संघर्ष ऐसा बात बताया सही समय ,सही अनुमान दिखाया जहाँ खेल-खेल में हँसना सिखे साथ रह-रह कर भी जीना सिखे जीवन की सच्ची सीढ़ी थी यादों में मस्त पीढ़ी थी लिखते हुए पढ़ना सिखे पढ़ते हुए हँसना सिखे दोस… Read more

चिंगारी को मिटाने ना दूँगा

*कविता* वक्त को रोक नहीं सकता हूँ, यादों को छोड़ नही सकता हूँ संसार को छोड़ सकता हूँ पर माँ का स्नेह रोक नही सकता हूँ वक्त कितना भी सताये दुनिया कितना हराये लक्ष्य का निशाना ना हटायेगें चिंगारी को आग ना बनायेगें साहस का पुकार सजायेगें संसार को हम बतायेग… Read more

खोया सा दिल है

*कविता* खोया सा डगर है ,खोया सा नर है खोया सा पल है,खोया सा मन है खोया सा दिल है,खोया सा प्यार है एक नर देखा ,बड़ा विचित्र देखा बड़ा बेचैन देखा ,आँखो नमी देखा हाथ में उसकी लाठी थी ना जाने उसकी साथी थी प्यासा था ,प्यार का दिवाना था घर उसका डगर था,मन उदास थ… Read more

संघर्ष से क्यों भागते हो?

*कविता* संघर्ष से क्यों  भागते हो? संघर्ष से क्यों नही लड़ते हो? भाग्य भी कुछ दिखाता है जीवन का संघर्ष बताता है उसकी हिम्मत भी दिखाता है उसके आगे अपनी राह बदला है जिंदगी का दर्पण मुझे दिखाता है वही डगर ,वही चाह मुझे बताताहै जिंदगी भी पतझड़ का झोका है जी… Read more

चिपके रहेगें पेड़ो के साथ रहेगें

*कविता* गरीबी के आँसू खुद ही पोछोगें खुद का सहारा लेकर खुद ही चलेगें किस्मत के आगे झुकेगें नही लकीर के पीछे रहेगें नही पेड़ो पर प्रहार को हम बचायेगें पेड़ों का मौन दर्द हम बतायेगें उसके गरीब रहकर हम दिखायेगें उसकी दर्द की भाषा हम बतायेगें विकास के साथ हत… Read more

वक्त तुझे बतायेगा

*कविता* लालच को जीवन में सजाया समय को समझ ना पाया उन्हें ये नही पता वक्त भी दोहराता है बीते हुए अतीत को भी बुलाता है वक्त का चक्र भी  उसे दिखाता है वक्त का इम्तिहान भी उसे सताता है मेरे हालत पर हँसकर दिखाया है मेरी गरीबी को तुने मजाक बनाया है वक्त को दोर… Read more

कविता वही है

*कविता* शाम वही है ,नये सवेरे की तलाश है जिंदगी वही है ,नये सफ़र की तलाश है कविता की राग हो,मेरी रागों में उसका साथ हो,मेरे हाथों में प्यार का इजहार हो,उसकी बातों में दिल का हाल हो,उसके हालों में उसका साथ हो,फुलों का गुलशन में उसके करीब हूँ,जन्नत की नजरों … Read more

ज़िंदगी अँधेरी हैं

*कविता*जिंदगी अँधेरी है ज़िंदगी अंधेरी है,उजाले की तलाश करता हूँ वक्त सोया है,उठाने की कोशिश करता हूँ ये राहो की डोर है,जो मुझे खिंच रही है मुझमे कुछ बात है,जो मुझे जोड़ रही है अपने छोड़ दिये है,उन्हे कुछ बताना चाहता हूँ समय के चक्र में ,उन्हें भी फँसाना चाह… Read more

सच्चाई की राग

*कविता* सच्चाई की बात सुनाता हूँ राहों की तहकी़कात सुनाता हूँ  लम्बे़ राग सुनाता हूँ स्त्री की बात सुनाता हूँ बढ़ता जा रहा है स्त्री पर अत्याचार बढ़ा जा रहा है,दरिंदो का अंहकार लड़कियों पर अत्याचार क्यों? दरिंदों पर पंख क्यों ? सोच उनकी गंदी क्यों? देश … Read more

जन्म लियो हो ,जीवन जीओ

*कविता* संघर्ष है जीना ही पड़ेगा खुशियाँ है लेना ही पड़ेगा जन्म लियो,जीवन जीओ जिंदगी को आराम में मत लाओ लालच के गुण  में मत लाओ किसी की बुराई भी मत बतलाओ जिंदगी को इरादे में लाओ संघर्ष किये हो,सफलता  में जाओगे हर साहस में धैर्य रखो हर बात में विचार रखो … Read more

शहर की परिभाषा

*कविता* शहर में भी जंग है जहाँ देखो,वही लोग तंग है यहाँ बादल भी दंग है यहाँ तन-मन में भी जंग है शहर बदला हालतों में षड्यंत्र बदला यंत्रों में लोग बदले गरीबों में धरती बदला बंजर में चेहरे मुरझाये से लगते है लंबे सताये से लगते है साँस जिनकी रुके,वह ठिक न… Read more

एक छोटी सी बात

*कविता* एक छोटी सी बात सुनाता हूँ यादों में एक राज़ सुनाता हूँ मुलाकात की डगर ऐसी थी वर्षों का मिलन जैसी थी मैं लौट गया बचपन की घड़ी में मैं लोट आया यादों की घड़ी में खू़ब मगन रहता था यादों में चमन बनकर खिल जाता था गरीबी रेखा भी थी ,ख़्वाबों की तकदीर भी … Read more

धरती को बदल डाला हम लोगों ने

*कविता* अंतर में अंतराल आया वक्त में इकरार आया यादों में प्रहार आया दिल में अहसास आया शहर को भाषण बना दिया जहाँ देखो,वहाँ शासन बना दिया विनाश को खुले पवन में लहरा दिया जहाँ देखो,वहाँ जंजीर बना दिया क्षिति को नरक बनाया ,हम लोगों ने जगह-जगह पेड़ो को रुलाय… Read more

कुछ सीखा हूँ

*कविता* मैं तब हारूँगा, जब मेरी साँस निकल जायेगा मैं तब-तक जागूँगा,जब-तक मैं सफल ना हो जाऊँ मैं तब-तक पिछा नही छोडू़ँगा,जब-तक मैं पा ना जाऊँ मैं तब-तक अंधेरे से टकराता रहूँगा,जब-तक उजाला ना मिल जाये कुछ सीखना है ,अनुभव से सिखों कुछ लिखना है,प्यार से लिखों क… Read more

कुछ बातें,समझा नही सकता

*कविता* विश्वास की कोई भाषा नही है,यहाँ सत्य को कोई पहचाना नही है,यहाँ महसुस करता हूँ, लोगों की जरुरतों को ध्यान रखता हूँ, जन्मदाता को छोड़ दिये संसार के लोग ,मैं किसके सहारे जीऊँगा बदल गया मेरा संसार ,मैं किसके सहारे रहूँगा गरीबों की कोई आवाज़ नही ,सुनता … Read more

छठ मईया के घाट जाना है,माथा वही झुकाना है

*कविता* छठ घाट जाना है माथा वहाँ झुकाना सुरज उगे ,सिर मैं झुकाऊंगा सुरज ढले, फिर भी सिर झुकाऊंगा जल में रहकर अरग देना है ठन्डे पानी में रहकर पर्व करना है मनोकामना का करुणा हो ,मईया छठ घाट का पर्व हो मईया सुर्य उगे,ऐसा प्रतीक्षा करुँगा मईया जागे,ऐसी प्र… Read more