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छोटा सा गाँव है मेरा
वक्त के शिकन्जे में आकर रोया हूँ
मैं अब जागा हूँ
वक्त तो चला ही गया
चिंगारी को मिटाने ना दूँगा
खोया सा दिल है
संघर्ष से क्यों भागते हो?
चिपके रहेगें पेड़ो के साथ रहेगें
वक्त तुझे बतायेगा
कविता वही है
ज़िंदगी अंधेरी हैं
सच्चाई की राग
जन्म लियो हो ,जीवन जीओ
शहर की परिभाषा
एक छोटी सी बात
धरती को बदल डाला हम लोगों ने
कुछ सीखा हूँ
कुछ बातें,समझा नही सकता
छठ मईया के घाट जाना है,माथा वही झुकाना है