future

शहर की परिभाषा


शहर में भी जंग है
जहाँ देखो,वही लोग तंग है
यहाँ बादल भी दंग है
यहाँ तन-मन में भी जंग है

शहर बदला हालतों में
षड्यंत्र बदला यंत्रों में
लोग बदले गरीबों में
धरती बदला बंजर में

चेहरे मुरझाये से लगते है
लंबे सताये से लगते है
साँस जिनकी रुके,वह ठिक ना सके
इंसान टूटे ,वह जुड़ भी ना सके

चारों दिशाओं में ,अंधेरा है
चारों तरफ डगेरा है
यहाँ रातों में तारे कम चमकते है
यही प्रदुषण के ढेर ज्यादा दमकते है

यहाँ चिड़चिड़े से लगते है,लोग
यही बिगड़े से लगते है,लोग
यहाँ अकेले में ही जीते रहते है लोग
 यही बगल में ही बसते रहते है लोग


Post a Comment

0 Comments