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सच्चाई की राग

*कविता*

सच्चाई की बात सुनाता हूँ
राहों की तहकी़कात सुनाता हूँ
 लम्बे़ राग सुनाता हूँ
स्त्री की बात सुनाता हूँ

बढ़ता जा रहा है स्त्री पर अत्याचार
बढ़ा जा रहा है,दरिंदो का अंहकार

लड़कियों पर अत्याचार क्यों?
दरिंदों पर पंख क्यों ?
सोच उनकी गंदी क्यों?
देश उनके  छोड़ा क्यों?

इस यौवन को यवन मत बनाओ
महिलाओं को सेवन मत बनाओ
सोच को गलत मत  लाओ
किसी पर नजर मत ढालो

हर नारी का सम्मान रखो
हर माँ का दिल प्यार रखो
हर बहन का बन्धन रखो
हर देश का प्यार रखो

देश हम लोग बचायेगें
एक नया इतिहास बनायेगें
कानुन को हम लोग सजायेगें
सरकार को हम लोग बनायेगें
भेदभाव हम  लोग हटायेगें


रचयिता:रामअवध


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