ज़िंदगी अँधेरी हैं

*कविता*जिंदगी अँधेरी है

ज़िंदगी अंधेरी है,उजाले की तलाश करता हूँ
वक्त सोया है,उठाने की कोशिश करता हूँ
ये राहो की डोर है,जो मुझे खिंच रही है
मुझमे कुछ बात है,जो मुझे जोड़ रही है

अपने छोड़ दिये है,उन्हे कुछ बताना चाहता हूँ
समय के चक्र में ,उन्हें भी फँसाना चाहता हूँ

दुनिया उलझन है,उसे सुलझाने की कोशिश करता हूँ
लोग अजीब है,उन्हे परखने की कोशिश करता हूँ
जिंदगी यूँही गुजार दूँ,ऐसी चाहत नही मुझमें
वक्त को सुला दूँ,ऐसी राहत नही मुझमें

तनहा रहकर भी ,शहनाई बनकर दिखाऊँगा
वक्त को छोड़ भी,आगे चलकर दिखाऊँगा
राहों के काँटे कब-तब रक्त बहायेगा
ये ज़मान मुझे कब-तब रोक पायेगा

आगे संघर्ष है,मुझे सहना है
आगे खाई है ,मुझे पा करना है
आगे चट्टान है,मुझे चढ़ना है
आगे मंजिल है ,मुझे पाना है

अपने वक्त में सो गया हूँ
ना जाने कहाँ खो गया हूँ

रचयिता:रामअवध

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