कविता वही है

*कविता*

शाम वही है ,नये सवेरे की तलाश है
जिंदगी वही है ,नये सफ़र की तलाश है

कविता की राग हो,मेरी रागों में
उसका साथ हो,मेरे हाथों में
प्यार का इजहार हो,उसकी बातों में
दिल का हाल हो,उसके हालों में
उसका साथ हो,फुलों का गुलशन में
उसके करीब हूँ,जन्नत की नजरों में
उसकी नजरे हो,मेरी नजरों में

ज़िंदगी बिता दूँ ,उसकी राहों में
राहों को छोड़ दूँ ,उसकी बातों में
साहस की लहर हो,तु मेरे जीवन में
साथ हो,अम्बर का स्वर है तुझमें

ज़िंदगी भर साथ ना छोड़ो
मेरी ऐसी अमानत तो रखो
तुम्हारे नजरें में मुझे बस जाने दो
तुम्हारे पलों में मुझे रह जाने दो

हवाओं में नयी मुस्कान हो
बादलों में नयी चमक हो
खेतों में नयी फसल हो
हरियाली में नयी रस हो
मौसम में नयी रंग हो

ज़िंदगी जीऊँ,खुले पलों में
वक्त को छोड़ दूँ,खुले नभ में
बादलों से छिपते सूर्य ढ़ले
बादलों से उगते सवेरा उगे

हँसते हुए चेहरे दिखे
किसी के दिलों में दर्द ना दिखे
प्यारों की जंजीर दिखे
हाथों में सबकी लकीर दिखे


रचयिता:रामअवध


0 Comments