future

कुछ बातें,समझा नही सकता

*कविता*

विश्वास की कोई भाषा नही है,यहाँ
सत्य को कोई पहचाना नही है,यहाँ
महसुस करता हूँ, लोगों की जरुरतों को
ध्यान रखता हूँ, जन्मदाता को

छोड़ दिये संसार के लोग ,मैं किसके सहारे जीऊँगा
बदल गया मेरा संसार ,मैं किसके सहारे रहूँगा
गरीबों की कोई आवाज़ नही ,सुनता
कोई उसकी पहचान क्यो?नही,बनता

जीवन भी उनका सरल नही होता
माथे पर पहाड़ लेकर चलना भी आसान नही होता
जीवन का पल ढालकर यूँ ही नही दिखा देते
जीवन जीकर यूँ ही नहीं बता देते

मेहनत के आगे,झुकते नही
किसी के आगे,गिरते नही
कुछ मजबूरियाँ होती ,जो दबा देती है
पर अन्दर की चिंगारी बुझा नही देती

लोगों के सामने,झुककर बढ़ना सिखा हूँ
हालत में रहकर ,कुछ लिखना सिखा हूँ
बड़े अजान लोग है यहाँ
बड़े छलकपट लोग है यहाँ

कौन? समझता है भावनाओ को
कौन? समझता है कष्टों को
कौन? जाने ये माटी की खुशबी
कौन? जानता है धरती की अजनबी

रचयिता:रामअवध


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