future

वक्त तुझे बतायेगा

*कविता*

लालच को जीवन में सजाया
समय को समझ ना पाया

उन्हें ये नही पता वक्त भी दोहराता है
बीते हुए अतीत को भी बुलाता है
वक्त का चक्र भी  उसे दिखाता है
वक्त का इम्तिहान भी उसे सताता है

मेरे हालत पर हँसकर दिखाया है
मेरी गरीबी को तुने मजाक बनाया है
वक्त को दोराऊँगा ,अतीत को बुलाऊँगा
वक्त आने पर तुझे दिखाऊँगा
समय का प्रतिशोध तुझे बताऊँगा
हकीक़त बनकर तुझे डराऊँगा

कब-तक लालच को जीवन में उतारेगा
कभी तो बुराई तुझको भी  रुलायेगा
कभी वक्त भी तुझको बहुत सतायेगा
कभी तो तुझे मेरी याद बहुत आयेगा

माना मेरी किस्मत पर दाग है
पर मेरी साहस में आग है
समय की सीढ़ी पर तुझे छोड़ता हूँ
पर यादों में तुझे जोड़ता भी हूँ

हर पल तुझे रुलायेगा
ढूँढ़ता मुझे तु आयेगा
फिर ना मिल सकूँ ऐसा वक्त लाऊँगा
अपना ही वक्त तुझे सतायेगा
लालच को जीवन में सजाया है


रचयिता:रामअवध


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