संघर्ष से क्यों भागते हो?

*कविता*

संघर्ष से क्यों  भागते हो?
संघर्ष से क्यों नही लड़ते हो?

भाग्य भी कुछ दिखाता है
जीवन का संघर्ष बताता है
उसकी हिम्मत भी दिखाता है
उसके आगे अपनी राह बदला है

जिंदगी का दर्पण मुझे दिखाता है
वही डगर ,वही चाह मुझे बताताहै
जिंदगी भी पतझड़ का झोका है
जीवन भी श्रावण का मौका है

जीवन का सही अर्थ पता नही
ख्वाबों में कभी आता ही नही
जीवन का सही खोज की तलाश है
जिंदगी का सही रोज़ की तलाश है

बादलों ने भी रास्ता मोड़ लिया
सफ़र ने भी साथ छोड़ दिया
कष्ट ने सुख को दबा  लिया
भाग्य ने मुझको रुला दिया

पतझड़ की तरह सुख गया हूँ
अपने वक्त में ही रो गया हूँ
अपना ही वक्त  मुझे  रुलानें लगा
जीवन का सुख सुलझाने  लगा

भाग्य ने भी मोड़ा है
घर पर आकर छोड़ा है


रचयिता:रामअवध



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