खोया सा दिल है

*कविता*

खोया सा डगर है ,खोया सा नर है
खोया सा पल है,खोया सा मन है
खोया सा दिल है,खोया सा प्यार है
एक नर देखा ,बड़ा विचित्र देखा
बड़ा बेचैन देखा ,आँखो नमी देखा

हाथ में उसकी लाठी थी
ना जाने उसकी साथी थी
प्यासा था ,प्यार का दिवाना था
घर उसका डगर था,मन उदास था

घर छोड़ा,परिवार छोड़ा
भाव छोड़ा, दिल को मोड़ा
समाज छोड़ा,भाग्य को तोड़ा
पीड़ा कहे,या नीड़ा
पर यादे कहे,या भीड़ा

अतीत बता रहा था
प्रीत लगा रहा था
उसके पास चला जा रहा था
जिंदगी को मोड़ा जा रहा था
भाग्य को  बदला जा रहा था

दुनिया से अलग था
बातों  में अलग था
राहों में अकेला था
यादों में पागल था

प्रेम भी क्या? प्रेम था
जिंदगी भी छोड़ दिया,ऐसा नर था
पर उसका भाव सही था
पर उसकी यादें वही था

रचयिता:रामअवध

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