चिंगारी को मिटाने ना दूँगा

*कविता*

वक्त को रोक नहीं सकता हूँ,
यादों को छोड़ नही सकता हूँ
संसार को छोड़ सकता हूँ
पर माँ का स्नेह रोक नही सकता हूँ

वक्त कितना भी सताये
दुनिया कितना हराये

लक्ष्य का निशाना ना हटायेगें
चिंगारी को आग ना बनायेगें
साहस का पुकार सजायेगें
संसार को हम बतायेगें
ऐसा वक्त हम लायेगें

हाथों की लकीरों को बदल दूँगा
बुरे वक्त को जंजीर में बाँध दूँगा
कौन? रोकेगा मुझे ,मैं उसे रोक दूँगा
कौन पकड़ेगा मुझे,मैं उसे बाँध दूँगा

जागे आँखों से सपना देखा
अपने वक्त को हँसते देखा
प्राकृतिक को बदलते देखा
मौसम का रंग लाते हुए देखा
वन को महकते हुए देखा
परिंदो को उड़ते हुए देखा
प्यार का गुण आते हुए देखा

रचयिता:रामअवध



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