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वक्त तो चला ही गया

*कविता*

आगे का राह गुरु ने दिखाया
समझाकर सभी को बताया
कर संघर्ष ऐसा बात बताया
सही समय ,सही अनुमान दिखाया

जहाँ खेल-खेल में हँसना सिखे
साथ रह-रह कर भी जीना सिखे
जीवन की सच्ची सीढ़ी थी
यादों में मस्त पीढ़ी थी

लिखते हुए पढ़ना सिखे
पढ़ते हुए हँसना सिखे
दोस्तो के साथ  रहना सिखे
गुरु जी बातें सुनना  सिखे

बाते से बताते थे,भाग्य की राह
समझ जाये बच्चो,यही किस्मत की राह

समाज से दूर पाठशाला था
भविष्य का वही माला था
सभी के पास वही ताला था
कुंजी हमारे मन में वही डाला था

वर्षों की सीढ़ी थी
यादों में पीढ़ी थी

हर यादों  में पाठ नजर आता है
दिल की गहराइयों राज़ नजर आता है
मैं उस पल को ठहरने को कहता हूँ
यादों को मोड़ने की कोशिश करता हूँ
वही वक्त को  ताजा करने की कोशिश करता हूँ
यादों में बस जाऊँ ऐसी  तलाश करता हूँ

वह वक्त तो चला ही गया
यादों में दुनिया छोड़ चला गया


रचयिता:रामअवध



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