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छोटा सा गाँव है मेरा

*कविता*

बादलों का अंधेरा कब?-तक रहेगा
तुफानों का डगेरा कब?-तक रोकेगा
मंजिल का दरवाजा कभी तो खुलेगा
कभी तो मेरा नाम इतिहास में लिखेगा
कभी तो मेरा ही चाँद खिलेगा

बहुत छोटी सी पहचान है मेरा
छोटा सा गाँव ,छोटा सा नाम है मेरा
लम्बा आशा है मेरे दिल में
लम्बा नशा है मेरे तहवील में

आसमान की अच्छाई छूने निकला था
परिंदो की उड़ान भरने निकला था
लम्बा पहचान बनने निकला था
कुछ कागज में लिखने बैठा था

मजबुरियाँ तुमे गिरायेगी
वक्त तुमे ही सतायेगी
जंजीर तुमे ही बाँधायेगी
साहस तुम्हारी तोड़ेयेगी

छोटा सा गाँव ,छोटा सा पहचान है मेरा
छोटा सा नाम ,छोटा सा घर है मेरा

रचयिता:रामअवध

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