एक छोटी सी बात

*कविता*

एक छोटी सी बात सुनाता हूँ
यादों में एक राज़ सुनाता हूँ
मुलाकात की डगर ऐसी थी
वर्षों का मिलन जैसी थी

मैं लौट गया बचपन की घड़ी में
मैं लोट आया यादों की घड़ी में
खू़ब मगन रहता था
यादों में चमन बनकर खिल जाता था

गरीबी रेखा भी थी ,ख़्वाबों की तकदीर भी थी
गाँव में खुशियाँ भी थी,जमीन में ख़ुशबू भी थी
सरोवर का लहर भी था,कमल की कोमलता भी थी
वस्त्रों की चमक नही थी,चेहरे पर हँसी की चादर थी

जग सूना लगता है
गाँव हसीना लगता है
कुटियाँ बसना है
लालटेन का यूँही जलना है

हर चीज से बेकार थे
राजनीति से अनजान थे

बैलगाड़ी के पीछे भागना है
नई दुल्हनिया को देखना है
बिजली का चमकना ,जो गिर जाये
 आग का बरसना ,जलते जल जाये

रचयिता:रामअवध





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