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किस्मत कहाँ? फूटेगी,भविष्य कहाँ? निकलेगी
जो दिल बोलेगा वही लिखूँगा
परी थी,सुहानी थी
शायरी
क्यों? पहचान की बात करते हो
शहींदो ने माटी को गुलामी नही,आज़ादी बनायी
शंका में ही शक का संदेश आया
भूमंडल में ख्वाब हूँ
मदहोश बना गया  हूँ
संसार छोड़ेंगे, कहाँ? होंगे
चलते है, काल के अतीत में
 देश जल रहा है,अग्नि के राख में
कदम पर डग नही है चल रहा हूँ
कदम कही  ठहर ना जाये
जीवन जीओ,तमन्ना बनाकर दिखाओ
बेहद दर्द  था उसकी बात
विधाता की राग में जाना चाहता हूँ
कविता तुम ही हो
हाथ बाँधा है, पथ घिरा हैं
किसने? कैसे? क्यो? बनाया ,समझ नही आया
अजान हूँ मैं,अजान ये जीवन
हिन्दी है हम,हिन्दुस्तान हमारा
क्या?पल था,कैसे? बताऊँ
मत लड़ो,कुदरत से
मेरा ख़्वाब हो
क्रोध में डुबा हूँ
माटी ने ऐसा इतिहास बताया
लक्ष्य को छोड़ा नही
ये जहान को मौन देखता हूँ
नारी को काली देवी बनाओ
कुदरत से मेरा नाता है
वीर तुम जागो,बेटियाँ तुम बचाओ