वीर तुम जागो,बेटियाँ तुम बचाओ

*कविता*

ये सिलसिला रुकता ही नही है
ये ज़माना कुछ बोलता ही नही है

नारी का सम्मान सही ,वक्त पर होना चाहिये
रात में महिलाये दिखे,उसका रक्षा  करना चाहिये
दरिंदों से लड़कर ,उसकी देह रक्षा बचाना चाहिये
देश को बचाओ,महिलाओ पर अत्याचार नही होना चाहिये

रूह को रहू में जलाया
हत्यारों को किसने? बचाया
महिलाओ को शिकार बनाया
घर बेटियों को किसने? झुकाया

रक्त को हम लोग बहायेगें
बेटियाँ हम लोग बचायेगें
जगह-जगह नजरे रखेगें
इन दरिंदो के लिए फंदे रखेगे

हर जगह दंगे है
कुछ लोग नंगे है
माँ-बहन को दबोचते है
हम लोग चुप क्यो? बैठते है

देश की वीर तुम जागो
इन दरिंदों लोग तुम मारो
इन लोगों ना कोई भी ना बचाओ
रक्तहीन करो,इन दरिंदो को

मोम अब नही जलेगा
खून उनका अब बहेगा


रचयिता:रामअवध


0 Comments