हिन्दी है हम,हिन्दुस्तान हमारा

*कविता*

हिन्दी है हम,हिन्दुस्तान है हम
भाषा हमारी ,हिन्दी है हम
हर जगह बोलने का अधिकार है हम
कवि हैं हम,कविता की पहचान है हम

लहरों जैसी स्वर है इसका
चाँद जैसा चंद बिन्दु है इसका
आभुषण जैसा अलंकार है इसका
हिन्दी है,हिन्दुस्तान है इसका

भाव से भाव का मिलना
बातों से इंसान का मिलना
अंगो से संकेत का मिलना
प्यार से ये जहान को देखना

विचारो की पहचान करना
भाषा हमारी शान से कहना
समझ जाये ,ऐसी अनुभव लगाना
बचपन का स्वर ,वही स्वर कहलता है

उदाहरण वही पहचान हमारी
देश की वही शान हमारी
हर जगह विस्तार हमारी
सब बोलते है ये देश हमारी

धरती वह राख नही हैं
जिसमें हमारी वह माँ नहीं हैं
संस्कृति हमारी पहचान है
देश हमारा आजाद है
हिमालय हमारा स्वर्ग है
गंगा हमारी माता है

देव धरती भूमि हमारी
हरा-भरा देश हमारा
इतिहास में हिन्दुस्तान हमारा
हर गाँव में देश हमारा
बलिदानों में देश हमारा
लड़ते हुए ये वीर हमारा


रचयिता:रामअवध

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