अजान हूँ मैं,अजान ये जीवन

*कविता*

अजान हूँ मैं,अजान मेरी उड़ान है
वक्त में हूँ मैं,वही मेरी पहचान है
हर संकट में हूँ मै,वही मेरी जीवन  है
हर लोग छोड़ दिये,वही मेरी सिख है

जिंदगी से दुखी यही इंसान देखता हूँ
वक्त छोड़ते हुए ,हे भगवान सुनता हूँ
ये जहान किसने? बनाया ,ऐसा मैं सोचता हूँ
चमत्कार को नही आविष्कार को देखता हूँ

प्राकृतिक क्या है?,उसको महसूस किया हूँ
जीवन क्या है? उसको जीकर देखा हूँ
पल क्या है? खुशियों में देखा हूँ
धरती क्या है? ये चट्टानों से देखा हूँ
भगवान क्या है?दुआओं में देखा हूँ

भाग्य को भविष्य दिखाना था
जंजीर को जीवन में दिखाना था
संकट को ,संघर्ष में दिखाना था
धरती को,स्वर्ग में  दिखाना था


रचयिता:रामअवध



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