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किसने? कैसे? क्यो? बनाया ,समझ नही आया

*कविता*

 मैं कौन हूँ? कहाँ से आया हूँ?
भूमंडल पर कैसा? नर बनकर आया हूँ
विचित्र मेरी नाया है विचित्र मैं ही काया हूँ
कुदरत की माया है जो नर बनकर आया हूँ

कुदरत को किसने बनाया होगा?
सागर को किसने बसाया होगा?
इसकी गहाराई को कौन? नापा होगा?
आकाशगंगा अनंत बुलंद बनाया होगा?
अनंत ग्रह को शक्ति ने बनाया होगा?

धरती पर जीवन किसी ने दिया होगा?
अम्बर पर पवन किसने लहराया होगा?
हर जीव पर अलग गुण किसने दिया होगा?
हर ह्रदय में किसी का वास होगा?

मन घबराया हुआ रहता है
अजीब बातों में घिमराया है
जीवन कुछ समय का ठहराव है
उसके बाद अजान में टकराव है

बुद्धि में इतनी समझ नही
हम इतने बड़े ज्ञान नही
लोगों में इतनी सच्चाई नही
जग में इतनी शांति नही

जिसने भी बनाया होगा ?
बड़ा प्रेम से सजाया होगा?
गुण-गुण की लकीर बाँधा होगा?
हर जगह साँस बसाया होगा?

रचयिता:रामअवध


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