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हाथ बाँधा है, पथ घिरा हैं

*कविता*

हाथ बाँधा हुआ है,भाग्य को मत बाँधो
जंजीर बाँधे है,उस इंसान को मत रुलाओ
अंधेरा उसका वक्त है,ओर अंधेरा मत लाओ
खोया उसका दिन है,उसे मत बुलाओ

उजाले को खोजता है,खुद को पहचानता है
खोया उसका किस्मत है,खोया सा नर भी है
जीवन जीना भी है,ख़्वाब को भी देखना है
माँ को सहारा देना है,जीवन भर साथ देना है

वक्त का शिकंजा कभी निद्रा को नयन नही देता
ख्वाहिश को कभी शिकस्त से कष्ट भी नही देता
नयनों की धारा नयन में ही बह कर रह जाती है
ह्रदय की धीरा ह्रदय में ही रह कर -रह जाती है

हाथ भी बाँध जायेगा ,बाँध जाने दो
किस्मत भी रुक जायेगा,रुकने दो
बदल भी चमकेगा ,तो चमकने दो
तुफान भी आयेगा, तो आने दो
हम भी यही खड़े है,उन्हें बताने दो

ऐसा वक्त लाओ,कुदरत से कहता हूँ
विधाता बनकर आओ,ऐसा उन्हें बोलता हूँ
सही समय लाओ,उनको भी पुकारता हूँ
संसार को बताओ,मैं ऐसा इंसान हूँ

अंधेरे को हटाने दे उसे
प्रकाश को पहचाने दे उसे
रास्ते का रुकावट मत दे उसे
खुद की शक्ति परखे दे उसे


रचयिता:रामअवध

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