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बेहद दर्द था उसकी बात

*कविता*

हाव-भाव की दशा भी लिखा हूँ
उसके ध्यान में कविता भी लिखा हूँ
उसके नयनों में प्रेम का संकेत भी देखा हूँ
उसकी आवाज़ में बेहद दर्द  भी देखा हूँ
जवाब में उसके प्रेम का संकेत भी नही आया
संवाद में उसके कोई संवाद भी नही आया

मैं अब ठहर गया हूँ ,उस पल से रुठ गया हूँ
अब मैं वही रुक गया हूँ,उसके प्यार को देखा हूँ
काँटों चुभते हुए देखा हूँ,फुलों खिलते हुए देखा हूँ
अब लोगों को पहचाना हूँ,अब जीवन को समझा हूँ

ज़माने में खड़ा कोई बोल रहा था
बड़ा ही दर्द-बेदर्द सुना रहा था
अकेला बैठा राग सुना रहा था
आसमान को देखकर कुछ बुला रहा था

वाहन की रफ्तार तेजी बढ़ रहा था
राहों में अकेला ही पैदल चल रहा था
बातें में ही गाने का धुन चल रहा था
इस शहर से कही दूर जा रहा था

मेरा ध्यान उसी पर बाँध गया था
उसके ख्यालों में ही रह गया था
उसके जाने से ध्यान टूटा था
ना जाने कहाँ चला गया था?

रचयिता:रामअवध




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