कदम कही ठहर ना जाये

*कविता*कदम कही ठहर ना जाये

चल रहे है,कदम कही रुक ना जाये
चल रहा है,साँस कही टूट ना जाये
जल रहा है,दिल कही राख ना हो जाये
अनजान जीवन है,कही भटक ना जाये

विश्वास है,कही शक में ना चला जाये
ज़िंदगी है,कही बेहाल में ना हो जाये
अनदेखी है,कही राहों में ना चला जाये
भाग्य है,कही काल में ना बदल जाये

जीवन है,कही शहनाई में ना चला जाये
पंख है,कही परिंदा बनकर ना उड़ जाये
चलना है ,कही ओर में ना चले जाये
समय है, कही वक्त में ना ठहर जाये

खामोशियाँ है,मगर शहनाई नही
तन्हाई है,मगर कही शहनाई नही

समय अंधेरा है,वक्त को उठाओ
दीप कहाँ? है ,उजाले को लाओ
काली रात है,तारों को जागाओ
जुगनूँ है,उसको मत भागाओ

हर जगह अंधेरा है,पथ पर डगमगाता हूँ
रास्तें अनेक है,मगर चलता अकेला हूँ

खुशियों का पल है,खुशियों में ही रहने दो
ठंडे हवाओं का झोंका है,झोंके में ही रहने दो
अंधेरे में जुगनूँ है,जुगनूँ को ही देखने दो
खुले गगन में रहना है,खुले में ही रहने दो

कदम कही ठहर ना जाये
वक्त कही रुक ना जाये

रचयिता:रामअवध


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