देश जल रहा है,अग्नि के राख में

*कविता*

अपना देश,अपनों ने ही जला दिया
ये धरती माँ को बेटे नें ही रुला दिया
बेकसूर का भी रक्त यही पर बहा दिया
ना जाने कौन? से लोग विद्रोह बना दिया
देश की विकास अपनों ही गिरा दिया

देश सबका है,इसे बिगाड़ों मत
आज़ादी का देश है,भागाओ मत
शहीदों का देश है, बिगाड़ों मत
शहीदों का रक्त है,बहाओ मत
चंदन की माटी है,धर्म में बाँटों मत

अपनों पर ही जंग है,रोकों इनको
दुनियाँ हँस रहा होगा बताओ इनको
ये देश हम सबका है,समझाओं इनको
आपस में ही जंग है,रोकों इनको

आपस में लड़ते रहेगें, देश भी घटते रहेगें
नुक्सान होते रहेगें, रक्त यूँही बहते रहेगें
देश यूँही जलता रहेगा, लोग यूँही देखते रहेगें
देश बदल जायेगा, इंसान सत्यानाश होते रहेगें

देश में शांति लाओ
अशांति मत फैलाओ
लोगों को रोको

रचयिता:रामअवध



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