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भूमंडल में ख्वाब हूँ

*कविता*

रात की ख़्वाब होती है,सुहानी से कम नही
वक्त की लाज होती है,कोई  जंजीर से कम नही
सवेरा भी होती है,कोई उम्मीद से कम नही
आत्मा भी बोलती है,नयी जिंदगी से कम नही

खुद को कभी अकेला मत समझों
हर चीज़ में कभी सफल मत समझों
हर सफलता में निराशा मत समझों
हर वक्त अपना इरादा मत बदलों

खुद के अन्दर ऐसा भी साथी है उसको मनाया करो
खुद से पुछा करो,हर वक्त ह्रदय में लुभाया करो
आत्मा की ख्वाहिश कभी किसी को मत बताया करो
अन्दर की साथी से अन्दर ही पुछा करो, हमें ना बताया करो

अकेला बैठा हूँ,जग में ही विलीन हो रहा हूँ
अन्दर का इंसान हूँ,खुद से ही प्रीत जोड़ रहा हूँ
भूमंडल की आहट हूँ,भूमंडल से ही दूर जा रहा हूँ
इस धरती माँ से प्रेम करता हूँ,उन्हें यही छोड़ रहा हूँ

मन का भाव हूँ, कही प्रतिशोध बनकर आ ना जाऊँ
हर वक्त में हूँ , कही परछाई बनकर ना आ जाऊँ
ये संसार की माया है, कही इन्हीं के साथ चला ना जाऊँ
ये कौन? सा माया नगरी है, कही यही ना ठहर जाऊँ

रचयिता:रामअवध

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