शहींदो ने माटी को गुलामी नही,आज़ादी बनायी

*कविता*

आओ बच्चों शहीदों की कहानी सुनाता हूँ
देश बच जाये, उन्हीं की प्रेम कहानी सुनाता हूँ
रक्त में हूँ चिंगारी,देश की रक्षा में तैयारी हूँ
शहीदों की अमर जवानी की कहानी सुनाता हूँ

माँ की ममता छोड़कर,भारत माँ की लाज बचाते है
अपना धर्म त्यागकर, देश ही धर्म है ऐसा बताते है

ठन्डी हवाओ का झोंका आये,या अग्नि में रह जायेगें हम
सभी कष्ट आयेगा,सभी को सह-सहकर रह जायेगे ं हम
जीवन वही त्याग देगें हम,देश में ही शहीद हो जायेगे हम
रक्त में रक्त बहा देगें हम,इस माटी की लाज हम बचा देगें हम
रात में ना सोकर नींद को जागते है हम,देश की रक्षा करेगें हम

लोग घरों सोये ऐसी रात हम काटते है
देश की सीमा पर मौत लेकर हम घुमते है

शहीद होकर भी अमर रहूँगा
देश के लिए जान देकर भी वतन रहूँगा
अपनी नयनों की धारा बहा दूँगा
भारत माँ की लाज बचा दूँगा
मैं अपना ही जीवन गवा दूँगा
देश के इतिहास में अपना जान लिख दूँगा
रक्त की बूँदों को बरसात बना दूँगा
इस धरती माँ का शृंगार सजा दूँगा

दुख तब होता है ?

अपने ही देश में अग्नि की चिंगारी लगा देते है
अपनों में ही अपने ही क्रांति फैला देते है
हमारी साहस को यूँही हवाओं में उड़ा देते है
शहीदों की याद हमेशा के लिए भुला देते है
अमर जवान ज्योति को बुझा कर रख देते है
भारत को धर्म की क्रांति बता कर रख देते है

               भेदभाव नही,देश भाव होना चाहिये
                            जयहिन्द

रचयिता:रामअवध


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