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परी थी,सुहानी थी

*कविता*

शांति भरी गली थी
आने वाली परी थी
सुहाने रंग में फली थी
यही उसकी लहरी थी

खुदा से माँगता हूँ ,साहस भरी नींद दे दो
नींद भरी रात के लिए सपनों की परी दे दो
उसी सपनों साथ जीवन की पहेली दे दो
हर वक्त में सही,यादें भरी रात तो दे दो

नगरी दुनियाँ से,कुदरत की दुनियाँ में जाना चाहता हूँ
यहाँ सब पैसे का खेल है,यही से मुड़ना चाहता हूँ
ख्वाहिश भरी रात है,उसे ख़्वाबों में देखना चाहता हूँ
परी के कदम-कदम पर ही स्नेह बनकर रहता हूँ

बादलों ने भँवरी की झलक दिखा दी
सपनों में भी ज़िंदगी का अर्थ  दिखा दी
कैसे? सुहाने पल ,शीतल के हवा में दिखा दी
परी की आकृति में ,स्वर्ग की द्वार दिखा दी

हर ख्यालों में अपनी याद बता दी
उसी के सहारे मेरी किताब बना दी

हर वक्त मेरी यादों खोई सी बरसात बन गयी
पतझड़ के मौसम में श्रावण बनकर आ गयी
नयी पत्तों में नयी चमक बनकर आ गयी
हर पत्तों में नयी उम्मीद नयी रंग बनकर आ गयी


रचयिता:रामअवध






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