नारी को काली देवी बनाओ


*कविता*

नारी  को कालीदेवी बनाओ
शासन-प्रशासन मत लाओ
देश न्यान को मत बुलाओ
नारी शक्ति को तुम बुलाओ
चौराये पर ही कटवाओ
उन दरिंदो को वही पर मरवाओ

सड़क पर उतर कर आओ
नौजवान बनकर दिखाओ
नारी को दंरिदो से बचाओ
घर आकर बहन को बताओ
बहन का कर्ज निभाकर दिखाओ

वैश्या भी देश बचाती है
बेटियाँ को भी बचाती है
दरिंदों का प्यास बुझाती है
खुद को हवाले करती है

शव जलाया ,देश की बेटियाँ जलाया
माँ का आँसू बहाया,चिराग को चलाया
शर्म करो,देश के नौजवान
शर्म करो,देश के पहलवान

कष्ट नही ,महाकष्ट दो
जीवन नही,मृत्यु दो
सजा नही,नरक दो
अंधेरा नही,अग्नि दो

कुदरत की कैसी लीला है?
जहाँ देखो,वही बलत्कारियोँ का मैला है

कानून न्याय नही,जनता न्यान चाहिए
जेल नही,जला कर मरना चाहिए
नारी पर अत्याचार बचाओ
सभी लोग देश को बचाओ
न्याय व्यवस्था तुम लोग बचाओ

प्रशासन नही,शासन नही न्यान चलेगा
देश नही ,विकास नही,जनता चलेगा
नारी का हरण नही ,दरिंदों का मरण चलेगा


दरिंदे अभी-भी नही रूक रहे है
देश अभी-भी झुक रहे है

रचयिता:रामअवध


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